E20 Janta Party Campaign: नीट (NEET) पेपर लीक विवाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 36 दिनों से जारी आंदोलन खत्म हुए अभी 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि देश के युवाओं और जेनरेशन जी (Gen Z) ने एक नया डिजिटल मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स (X) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर 'E20 जनता पार्टी' नाम से शुरू हुए इस अभियान ने जरूर सरकार को फिर सोचने पर मजबूर कर दिया होगा, क्योंकि सरकार इस बार सोशल मीडिया पर युवाओं के प्रोटेस्ट को बिलकुल भी हल्के में नहीं लेना चाहेगी।
'धर्मेंद्र प्रधान गया, अबकी बार गडकरी बाहर!' जैसे मीम्स, पोस्ट और मॉक कैंपेन स्लोगन के जरिए अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और सरकार की E20 फ्यूल (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को सीधे निशाने पर लिया जा रहा है।
रातों-रात लाखों में पहुंचे फॉलोअर्स
CJP के आंदोलन की शैली को अपनाते हुए इस नए अभियान ने न्यूनतम विजुअल्स और तीखे मीम्स के जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जबरदस्त प्रभाव जमाया है। शनिवार तक गिने-चुने फॉलोअर्स वाले 'E20 जनता पार्टी' के एक्स (X) अकाउंट पर कुछ ही घंटों के भीतर 50 हजार के करीब फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं। इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स का आंकड़ा 8,800 से उछलकर सीधे 2 लाख के पास पहुंच गया है, जिसके बाद इसके नाम से अन्य पेज भी बनने लगे हैं।
आंदोलनकारियों द्वारा शेयर की जा रही रील्स में लिखा है, 'Gen Z की केवल एक मांग: गडकरी इस्तीफा दो' और 'अगले विरोध प्रदर्शन में नितिन गडकरी के यहां मिलते हैं।'
क्या हैं E20 जनता पार्टी की मुख्य मांगें?
सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में 'E20 जनता पार्टी' ने खुद को एक गैर-राजनीतिक, स्वतंत्र नागरिक अभियान बताया है।
संगठन की मुख्य मांगें:
फ्यूल च्वाइस (ईंधन चुनने का अधिकार): देश के सभी पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल के साथ-साथ 100 प्रतिशत एथनॉल-मुक्त खरीदने का विकल्प दिया जाए।
पारदर्शी लेबलिंग: पेट्रोल पंपों पर स्पष्ट रूप से लिखा हो कि उपभोक्ता जो ईंधन खरीद रहे हैं, उसमें कितना प्रतिशत एथनॉल मिला हुआ है।
स्वतंत्र अध्ययनों का प्रकाशन: एथनॉल मिश्रण के कारण गाड़ियों के माइलेज, इंजन की क्षमता, रख-रखाव के खर्च और उत्सर्जन पर पड़ने वाले असर की पारदर्शी और निष्पक्ष रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
कोई सब्सिडी या छूट नहीं: अभियान का कहना है कि वे किसी सब्सिडी या मुफ्त पेट्रोल की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ अपनी पसंद का ईंधन खरीदने का लोकतांत्रिक अधिकार चाहते हैं।

भारत में E20 का विरोध
किसने बनाई E20 जनता पार्टी?
ये एक इंडिपेंडेंट सिटिजन कैंपेन है, जिसका उद्देश्य सिर्फ उन मुद्दों को उठाना है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं। संगठन ने बताया हमारी एकमात्र प्राथमिकता पारदर्शिता सुनिश्चित करना, उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना और भारत की E20 (20 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) पॉलिसी के वास्तविक असर पर खुली और निष्पक्ष सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देना है।
E20 जनता पार्टी ने कहा, 'हम किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन या प्रचार नहीं करते। हमारा समर्थन सिर्फ देश के नागरिकों और उनके अधिकारों के साथ है। इस अभियान के पीछे कौन है या इसे कहां से संचालित किया जा रहा है, जैसी अफवाहों और अटकलों में उलझने के बजाय असली मुद्दे पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसी बातें केवल लोगों का ध्यान मूल सवालों से भटकाती हैं।'
कहा, 'हमारी मांग बिल्कुल साफ है। जवाबदेही हो। फ्यूल पॉलिसी और उसके इम्पैक्ट को लेकर पूरी पारदर्शिता हो। और देश के उपभोक्ताओं की आवाज सुनी जाए, ताकि उनकी राय और कंसर्न को भी बराबर महत्व मिले।'
ट्रांसपोर्टर्स का समर्थन: 4 अगस्त को संसद मार्च की घोषणा
यह आंदोलन सिर्फ डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर ट्रांसपोर्टर्स का भी भारी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। 'दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर एसोसिएशन' ने E20 पेट्रोल नीति के विरोध में 4 अगस्त को संसद भवन तक मार्च निकालने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। ट्रांसपोर्टर्स का आरोप है कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के कारण वाहनों का माइलेज काफी गिर गया है, इंजन का परफॉरमेंस खराब हो रहा है और मेंटेनेंस का खर्च दोगुना हो गया है।
बता दें कि वर्तमान में देश में 100-ऑक्टेन वाला बिना एथनॉल वाला प्रीमियम पेट्रोल उपलब्ध तो है, लेकिन यह दिल्ली में ₹169 प्रति लीटर की अत्यधिक ऊंची दर पर सिर्फ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर मिलता है, जबकि सामान्य E20 पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर पर बेचा जा रहा है। दूसरी ओर, संसद के मानसून सत्र में पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि सरकार को एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों के इंजन खराब होने या प्रदर्शन घटने की कोई व्यापक या प्रामाणिक शिकायतें प्राप्त नहीं हुई हैं। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि CJP की तर्ज पर शुरू हुआ यह डिजिटल मीम-आंदोलन सरकार को अपनी नीति बदलने पर मजबूर कर पाता है या नहीं।
