High-Calibre Bomb Trial: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से लगातार भारत की सैन्य क्षमताओं में इजाफा हो रहा है। इस बीच, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को रविवार को एक और उपलब्धि हासिल हुई। टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) ने हरियाणा के पंचकूल के रामगढ़ स्थित डीआरडीओ यूनिट में एक हाई-कैलिबर बम का परीक्षण किया। यह परीक्षण वायुसेना के आधिकारियों की देखरेख में संपन्न हुआ।
अधिकारियों के मुताबिक, हाई-कैलिबर बम का परीक्षण सफल रहा और स्थापित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत इसे अंजाम दिया गया। परीक्षण के दौरान बम के टुकड़े 1.5 किलोमीटर की दूरी तक उड़ने की आशंका थी। सुरक्षा की दृष्टि से 2 किलोमीटर के दायरे को संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया था।
ग्लाइड वेपन सिस्टम की सफल टेस्टिंग
इससे पहले, भारत ने स्वदेशी हथियार प्रणाली 'टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन' (TARA) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया था। यह परीक्षण 07 मई को ओडिशा तट के पास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ व भारतीय वायुसेना ने किया था। दरअसल, टारा एक विशेष 'ग्लाइड वेपन सिस्टम' है। यह सिस्टम सामान्य बिना-मार्गदर्शन वाले बमों और वारहेड को अत्याधुनिक 'प्रिसिजन गाइडेड' हथियार में बदल देता है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस नई प्रणाली के जरिए काफी कम लागत में दुश्मन के जमीनी ठिकानों को अधिक प्रभावी तरीके से नष्ट किया जा सकेगा। डीआरडीओ के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर इस प्रणाली को विकसित किया है। टारा की खास बात यह है कि यह अत्याधुनिक, लेकिन कम लागत वाली तकनीक का उपयोग करता है। इसके जरिए हथियार की मारक क्षमता और निशाने की सटीकता दोनों बढ़ती हैं। इस परियोजना में भारतीय उद्योगों की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही।
'डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर्स' यानी डीसीपीपी और अन्य भारतीय कंपनियों ने इसके विकास में सहयोग किया है। अब इस प्रणाली के उत्पादन का काम भी शुरू हो चुका है।
