Delhi Transfer Posting Case: दिल्ली में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और केन्द्र शासित राज्यों के (दानिक्स) कैडर के अधिकारियों के तबादले पर केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाया। इसके खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए आम आदमी पार्टी से संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करने के लिए विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। इस क्रम में उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान पंजाब के सीएम भगवंत मान, आप नेता संजय सिंह और आतिशी व सपा नेता शिवपाल यादव भी मौजूद थे।
अखिलेश यादव को थैंक्स- केजरीवाल
मुलाकात के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर गैर-बीजेपी पार्टियां एक साथ आती हैं तो यह अध्यादेश राज्यसभा में पराजित हो सकता है और इससे एक मजबूत संदेश जाएगा कि मोदी सरकार 2024 में सत्ता में नहीं आ रही है। मैं सपा प्रमुख अखिलेश यादव को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि उनकी पार्टी राज्यसभा में हमें समर्थन देगी। केजरीवाल ने कहा कि अगर बीजेपी विरोधी सभी पार्टियां एकजुट हो जाती हैं और राज्यसभा में, जहां बीजपी बहुमत में नहीं हैं, इस अध्यादेश को हरा देती हैं तो इससे देश को एक बड़ा संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में बीजेपी के पास केवल 93 सीटें हैं, अगर बीजेपी विरोधी सभी पार्टियां एकजुट होती हैं और इस अध्यादेश को हरा दिया जाता है तो यह 2024 का सेमीफाइनल होगा। केजरीवाल ने कहा कि हमने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ चर्चा की और हम उनका धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने हमें आश्वस्त किया है कि वे राज्यसभा में हमारा समर्थन करेंगे।
अध्यादेश लोकतंत्र विरोधी है- अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अध्यादेश लोकतंत्र विरोधी है। मैं सीएम अरविंद केजरीवाल को आश्वस्त करना चाहता हूं कि समाजवादी पार्टी आपके साथ है और आपका समर्थन करेगी। सपा प्रमुख ने आम आदमी पार्टी (आप) को समर्थन देने का आश्वासन दिया और इस अध्यादेश को लोकतंत्र विरोधी करार दिया। यादव ने कहा कि मेरी पार्टी आपके साथ है।
अध्यादेश को लेकर ये है मामला
केंद्र ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और केन्द्र शासित राज्यों के (दानिक्स) कैडर के अधिकारियों के तबादले और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सिविल सेवा प्राधिकरण बनाने के उद्देश्य से 19 मई को एक अध्यादेश जारी किया था। यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिल्ली में निर्वाचित सरकार को पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि से संबंधित मामलों को छोड़कर अन्य मामलों का नियंत्रण सौंपने के बाद लाया गया था।
