नेशनल हेराल्ड मामले में बड़ी कार्रवाई, डीके शिवकुमार को EOW का नोटिस; 19 दिसंबर तक मांगे सभी दस्तावेज
- Edited by: अनुराग गुप्ता
- Updated Dec 5, 2025, 11:17 PM IST
National Herald Case: नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को नोटिस भेजा है। नोटिस में उनसे जांच से जुड़े सभी वित्तीय रिकॉर्ड और कांग्रेस पार्टी से जुड़ी जानकारी देने को कहा गया है। नोटिस में उनसे 19 दिसंबर तक ईओडब्ल्यू ऑफिस में दस्तावेज/जानकारी जमा करने को कहा गया है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (फाइल फोटो)
National Herald Case: नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को नोटिस भेजा है। नोटिस में उनसे जांच से जुड़े सभी वित्तीय रिकॉर्ड और कांग्रेस पार्टी से जुड़ी जानकारी देने को कहा गया है।
शिवकुमार को EOW का नोटिस
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने डीके शिवकुमार को नोटिस जारी कर उनसे वित्तीय और लेन-देन से जुड़ी जानकारी देने को कहा है। 29 नवंबर को भेजे गए नोटिस में उनसे 19 दिसंबर तक ईओडब्ल्यू ऑफिस में दस्तावेज/जानकारी जमा करने को कहा गया है। जांचकर्ताओं ने उनके पर्सनल बैकग्राउंड और कांग्रेस पार्टी के साथ उनके जुड़ाव की पूरी जानकारी मांगी है।
दान के पैसे पर उठे सवाल?
नोटिस में कहा गया, ''किसके कहने/निर्देश पर आपने या आपकी जुड़ी हुई कंपनियों ने दान के नाम पर ऊपर बताए गए पेमेंट किए? क्या आपको उन फंड्स के अंतिम इस्तेमाल के बारे में जानकारी थी, जो M/s यंग इंडियन (YI) को ट्रांसफर किए गए थे? अगर हां, तो पूरी डिटेल्स दें।"
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों ने कहा कि उन्हें भाजपा के साथ के साथ तालमेल नहीं बिठाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है और यह दर्शाता है कि वह कांग्रेस के लिए ‘‘झटका झेलने’’ वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शिवकुमार कांग्रेस नेताओं में ‘‘सबसे अधिक सताए गए’’ हैं लेकिन भाजपा उन्हें ‘‘तोड़ने’’ में सफल नहीं होगी।
क्या है पूरा मामला?
नेशनल हेराल्ड मामला मूल रूप से भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा 2013 में की गई एक निजी शिकायत पर आधारित है। यह इस आरोप पर आधारित है कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की 988 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को ‘यंग इंडियन’ ने 2010 में एआईसीसी से जुड़े एक लेनदेन के माध्यम से 50 लाख रुपये में खरीद लिया था।
प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में एजेएल की परिसंपत्ति को ‘यंग इंडियन’ को हस्तांतरित करने के संबंध में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया गया है। ‘यंग इंडियन’ एक ऐसी कंपनी है जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की संयुक्त रूप से 76 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
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