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अफजल गुरु-मकबूल भट्ट की कब्र तिहाड़ से शिफ्ट करने की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल हुई याचिका

दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि तिहाड़ जेल नंबर-3 में बने आतंकी अफजल गुरु और मकबूल भट्ट की कब्रों को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। याचिका में कहा गया है कि यह शहीदों का अपमान और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

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दिल्ली हाई कोर्ट (फोटो साभार: ANI)

Photo : ANI

दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है जिसमें मांग की गई है कि आतंकी मोहम्मद मकबूल भट्ट और मोहम्मद अफजल गुरु की कब्रों को तिहाड़ जेल से हटाकर किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ नामक संस्था ने दाखिल की है।

तिहाड़ जेल नंबर-3 में बनी हैं कब्रें

याचिका के अनुसार, इस समय दोनों आतंकियों की कब्रें तिहाड़ जेल नंबर-3 में स्थित हैं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि इन कब्रों का जेल परिसर में बने रहना जेल कानून, दिल्ली जेल नियमावली 2018 और दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 का उल्लंघन है।

शहीदों और जनता की भावनाओं का अपमान

याचिका में कहा गया है कि इन आतंकियों को भारत की पवित्र भूमि पर दफनाए रखना न केवल देश के शहीदों के बलिदान का अपमान है, बल्कि यह आम नागरिकों की भावनाओं को भी आहत करता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आतंकियों को श्रद्धा का प्रतीक बनाना देशहित के खिलाफ है और इससे युवाओं में गलत संदेश जा सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अपील की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए इन कब्रों को किसी अज्ञात एवं गुप्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो इन कब्रों का इस्तेमाल आतंकी और अलगाववादी संगठन देशविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कर सकते हैं।

अदालत के सामने उठाई गई ये मुख्य मांगें

याचिका में स्पष्ट रूप से दो मुख्य मांगें रखी गई हैं। पहली, अफजल गुरु और मकबूल भट्ट की कब्रों को तिहाड़ जेल से हटाया जाए। दूसरी, उनके अवशेषों को किसी गुप्त स्थान पर ले जाकर दफनाया जाए ताकि इन्हें प्रतीक बनाकर किसी भी तरह का महिमामंडन न हो सके।

कब्रों के श्रद्धास्थल बनने का जताया खतरा

याचिका में यह भी कहा गया है कि जेल परिसर में कब्रों का बने रहना तिहाड़ को एक तरह के श्रद्धास्थल में बदल देता है। इससे चरमपंथी तत्व इकट्ठे हो सकते हैं और आतंकवादियों को शहीद का दर्जा देकर उन्हें महिमामंडित कर सकते हैं। यह न केवल जेल अनुशासन के खिलाफ है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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