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अंडमान सागर के ऊपर चक्रवाती तूफान की आहट, कई राज्यों में बिगड़ सकता है मौसम

IMD Weather Forecast: भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि चक्रवाती परिसंचरण का क्षेत्र मध्य अंडमान सागर के ऊपर बना हुआ है। इसके प्रभाव से 21 अक्टूबर के आसपास बंगाल की खाड़ी और उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर एक निम्न दबाव वाला क्षेत्र बनने की आशंका है।

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Cyclone

Photo : BCCL

3IMD Weather Forecast: अंडमान सागर के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण का क्षेत्र बन गया है और सोमवार तक इसके कम दबाव वाले क्षेत्र में तब्दील होने की आशंका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। इसका असर अगले सप्ताह उत्तरी आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के तटीय क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

आईएमडी ने एक बुलेटिन में कहा,चक्रवाती परिसंचरण का क्षेत्र मध्य अंडमान सागर के ऊपर बना हुआ है। इसके प्रभाव से 21 अक्टूबर के आसपास बंगाल की खाड़ी और उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर एक निम्न दबाव वाला क्षेत्र बनने की आशंका है। इसके बाद उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़कर 23 अक्टूबर के आसपास इसके एक अवदाब में में तब्दील हो जाने की आशंका है।

सोमवार तक स्पष्ट होगी तस्वीर

आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि निम्न दबाव का क्षेत्र बनने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। महापात्रा ने कहा, आईएमडी ने इस बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया है कि यह प्रणाली चक्रवाती तूफान में बदलेगी या नहीं। महापात्रा ने कहा कि 22 से 25 अक्टूबर तक समुद्र की स्थिति खराब रहने की आशंका है। ओडिशा के तटीय क्षेत्र में 23-25 अक्टूबर तक भारी बारिश होने की संभावना है। उन्होंने मछुआरों को 21 अक्टूबर तक तट पर लौटने का सुझाव दिया। आईएमडी के पूर्वानुमान में कहा गया है कि रविवार को दक्षिणी ओडिशा, उत्तरी तटीय ओडिशा के जिलों में एक या दो स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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