Renuka Chaudhary Controversial Statement: कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद रेणुका चौधरी संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन एक कुत्ते को भारतीय संसद परिसर में ले आईं, जिससे भारी विवाद पैदा हो गया। जब रेणुका चौधरी से उनके कुत्ते को संसद में लाने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सियासी टिप्पणी कर दी जिससे हंगामा हो गया। रेणुका ने कहा कि असली डसने वाले और काटने वाले संसद में बैठे हैं। सरकार चलाते हैं। उसका कोई ऐतराज नहीं। हम किसी गूंगे जानवर की देखभाल करते हैं तो ये चर्चा का मुद्दा बन जाता है। और कुछ नहीं है क्या सरकार के पास। मैं संसद में हूं, मैंने उसे घर पर भेज दिया। मेरे पास घर में ऐसे कई कुत्ते हैं।
रेणुका चौधरी का पीएम मोदी पर निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, क्या 'ड्रामामास्टर' हमें सिखाएंगे? हमें उनसे सीखने की जरूरत है कि ड्रामा कब और कैसे करना है... हम यह नहीं जानते क्योंकि हम अपने दिल से काम करते हैं और बहुत जमीन से जुड़े हुए हैं... वह (पीएम मोदी) अब एक मनोवैज्ञानिक, सलाहकार बन गए हैं, उन्होंने एक और योग्यता हासिल कर ली है।
पीएम मोदी पर कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे बड़ा ड्रामेबाज बताया और कहा कि संसद में विपक्ष पर ड्रामा करने का आरोप लगाने वाला उनका बयान सिर्फ पाखंड है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों के वास्तविक मुद्दों को संबोधित करने के बजाय, एक बार फिर अपनी 'ड्रामेबाजी डिलीवरी' की है। खड़गे ने अपनी पोस्ट में कहा, भाजपा को अब ध्यान भटकाने का यह नाटक खत्म करना चाहिए और संसद में लोगों के सामने आने वाले वास्तविक मुद्दों पर बहस करनी चाहिए।
इससे पहले दिन में पीएम मोदी ने संसदीय कार्यवाही को बाधित करने के लिए विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, हमें जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करने की जरूरत है। संसद ड्रामा करने की जगह नहीं है, यह डिलीवरी की जगह है।
बिहार चुनावों में विपक्षी दलों की हार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी हार से परेशान है और हार को पचा नहीं पा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, कुछ समय से हमारी संसद का उपयोग या तो चुनावों के लिए वार्म अप अखाड़े के रूप में किया जा रहा है या हार के बाद निराशा के आउटलेट के रूप में। हार व्यवधान पैदा करने का आधार नहीं होनी चाहिए। जीत को भी अहंकार में नहीं बदलना चाहिए। बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार, 1 दिसंबर को शुरू हुआ। सत्र 19 दिसंबर को समाप्त होगा।
