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क्या है पाक-चीन का गेम प्लान? घाटी में आतंक को फिर से कर रहा एक्टिव, निशाने पर 'लद्दाख सेक्टर'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 22, 2023, 01:45 PM IST

Rajouri Terror Attack: गलवान घाटी में संघर्ष के बाद भारत ने पीएलए का मुकाबला करने के लिए लद्दाख सेक्टर में भारी मात्रा में सैनिकों की तैनाती की है। अब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंक बढ़ाकर भारत पर लद्दाख से सेना हटाने का दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

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घाटी में आतंक को एक्टिव कर रहा पाकिस्तान

Photo : ANI

Rajouri Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में आतंकियों ने घात लगाकर सेना के काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में पांच जवान शहीद हो गए तो 3 गंभीर रूप से घायल हो गए। इस आतंकी हमले के बाद रक्षा सूत्रों ने बड़ा खुलासा किया गया है। रक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान घाटी में आतंक को फिर से एक्टिव करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए उसने 25 से 30 आतंकियों की घुसपैठ कराई है, जो रजौरी-पुंछ सेक्टर के वन क्षेत्रों में छिपे हुए हैं।

सेना को संदेह है कि इस क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने की योजना के निशारे पर लद्दाख सेक्टर है। दरअसल, चीन से मुकाबला करने के लिए सेना ने लद्दाख में भारी मात्रा में सैनिकों की तैनाती की है। हालांकि, पाकिस्तान रजौरी और पुंछ में आतंक को एक्टिव कर लद्दाख सेक्टर से सैनिकों को हटाने और इस क्षेत्र में बलों को फिर से तैनात करने के लिए दबाव डालने की कोशिश कर रहा है। ,

2020 में पुंछ से हटाकर लद्दाख में हुई थी तैनाती

बता दें, 2020 में भारत-चीन सीमा पर बढ़े तनाव के बाद भारतीय सेना ने राष्ट्रीय राइफल्स की यूनिफ़ॉर्म फोर्स को पुंछ सेक्टर से लद्दाख में स्थानांतरित कर दिया था। तब से वहां पर बड़ी मात्रा में सैनिकों की तैनाती है, जिससे चीन पर दबाव डाला जा सके। रक्षा सूत्रों का कहना है कि अब पाकिस्तान और चीन ने गठजोड़ किया है, जिससे भारतीय सेना पर जम्मू-कश्मीर सेक्टर से बाहर न निकलने और चीन सीमा पर सैनिकों को तैनाती नहीं करने का दबाव डाला जा सके।

25 से 30 आतंकियों की हुई घुसपैठ

सूत्रों ने कहा कि लगभग 25-30 पाकिस्तानी आतंकवादी सुरक्षा बलों पर हमले करने के लिए पुंछ राजौरी सेक्टर के ऊपरी इलाकों में जंगली इलाके में छिपे हुए हैं। जब से यूनिफ़ॉर्म फोर्स लद्दाख ऑपरेशन के लिए रवाना हुई है, पाकिस्तान ने भारतीय सैनिकों के खिलाफ हमले करने के लिए पाकिस्तान से अपने आतंकवादियों को क्षेत्र में भेजना शुरू कर दिया है, जिससे भारत को क्षेत्र में अपने सैनिकों को फिर से तैनात करने के लिए मजबूर किया जा सके। बता दें, भारतीय सेना ने हाल ही में आतंकवादी गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए एक और ब्रिगेड को तैनात किया था और क्षेत्र में सफलता हासिल की है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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