केंद्र सरकार अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के कुछ अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद एक्सटेंशन देने पर विचार कर रही है। यह सेवा विस्तार उन अग्निवीरों से अलग होगा, जिन्हें नियमित सैनिक के तौर पर सेना में शामिल किया जाएगा। इस प्रस्ताव को लेकर पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कई उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं।
पहले बैच के अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल 21 नवंबर 2026 को पूरा होने जा रहा है। इससे पहले 25 प्रतिशत तक अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। अब सरकार बाकी अग्निवीरों में से कुछ को सेवा विस्तार देने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। हालांकि, अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। अगर सेवा विस्तार को मंजूरी मिलती है, तो इसकी अवधि कितनी होगी और किन अग्निवीरों को इसका लाभ मिलेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है।
क्या है अग्निपथ योजना?
अग्निपथ योजना की शुरुआत 14 जून 2022 को की गई थी। इसके तहत 17.5 से 21 साल की उम्र के युवाओं को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में चार साल के लिए अग्निवीर के तौर पर भर्ती किया जाता है।
चार साल की सेवा के दौरान अग्निवीरों को हर महीने वेतन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। सेवा पूरी होने पर उन्हें करीब 11.71 लाख रुपये की सेवा निधि एकमुश्त दी जाती है। हालांकि, इस योजना के तहत सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को नियमित सैनिकों की तरह पेंशन नहीं मिलती है।
25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा का मौका
अग्निपथ योजना के नियमों के मुताबिक, हर बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए अग्निवीरों का प्रदर्शन, योग्यता, संगठन की जरूरत और संबंधित सेना की नीतियों को ध्यान में रखा जाता है।
बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल बाद सेवा से मुक्त कर दिया जाता है। उन्हें सेवा निधि के साथ भविष्य में रोजगार और अन्य अवसरों के लिए सहायता देने की व्यवस्था की गई है।
पिछले महीने भारतीय वायुसेना ने अपने पहले अग्निवीर वायु बैच के 2,850 जवानों में से 712 को नियमित सेवा में बनाए रखने का फैसला किया था।
पहले बैच के अग्निवीरों का कार्यकाल समाप्त होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। ऐसे में सरकार के संभावित फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेवा विस्तार का प्रस्ताव मंजूर होने पर अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए जवानों के भविष्य और सेना की मानव संसाधन नीति में एक अहम बदलाव देखने को मिल सकता है।
