Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा की उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से मिली छूट को चुनौती दी गई है। अदालत ने इस याचिका को इसी मुद्दे पर पहले से लंबित अन्य मामलों के साथ टैग कर दिया है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक ही मुद्दे पर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल किए जाने पर मौखिक टिप्पणी की। CJI ने कहा कि अगर मुद्दा अलग नहीं है तो नई याचिका दाखिल नहीं की जानी चाहिए। इसके बजाय पहले से लंबित मामले में पक्षकार बनने के लिए इम्प्लीमेंट आवेदन दाखिल किया जा सकता है।
CJI बोले- इस तरह मुख्य मामले की सुनवाई में होती है देरी
सुनवाई के दौरान मनोज झा की ओर से पेश वकील ने बताया कि इसी मुद्दे पर कुछ अन्य मामले भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इस पर CJI ने टिप्पणी की, 'इस तरह कार्यवाही में देरी होती है।' CJI ने कहा कि अगर किसी नई याचिका में कोई अलग मुद्दा नहीं उठाया गया है तो उसी विषय पर एक और याचिका दाखिल करने की जरूरत नहीं है। संबंधित पक्ष पहले से लंबित मामले में इम्प्लीमेंट आवेदन दाखिल कर सकता है।
समान मुद्दे से जुड़े लंबित मामलों के साथ जोड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार के सदस्यों को भी इस तरह की अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने से बचने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, अन्यथा मुख्य मामले की सुनवाई में देरी होगी। मनोज झा के वकील ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर किसी सांसद की ओर से दाखिल यह एकमात्र याचिका है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए इसे समान मुद्दे से जुड़े लंबित मामलों के साथ जोड़ दिया।
क्या है मनोज झा की याचिका में चुनौती?
मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। इस धारा के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए या किए जाने का दावा किए गए कार्यों के लिए सिविल और आपराधिक कार्यवाही से संरक्षण दिया गया है। याचिका में इस कानूनी संरक्षण को चुनौती देते हुए इसकी संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले को इसी विषय पर लंबित अन्य याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए देखेगा।
