Congress: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों की सरकार के मुख्यमंत्रियों को पक्षपाती केंद्रीय एजेंसियों द्वारा मनमाने ढंग से गिरफ्तार कराने के बाद उन्हें तुरंत पद से हटाकर विपक्ष को अस्थिर करने के लिए कानून लाने की मंशा रखती है। प्रमुख विपक्षी दल का यह आरोप उन खबरों के बाद आया है जिनमें कहा गया है कि सरकार बुधवार को संसद में तीन विधेयक पेश करने की योजना बना रही है, जिनमें गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार या हिरासत में लिये गये प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का प्रावधान है।
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को चुनाव में हरा पाने में विफल रहने के बाद उन्हें हटाने के लिए ऐसा कानून लाना चाहती है। उन्होंने एक्स पर कहा कि यह कैसा दुष्चक्र है! गिरफ्तारी के लिए किसी दिशानिर्देश के पालन की आवश्यकता नहीं! विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियां अनियंत्रित और अनुचित।
विपक्ष को अस्थिर करना चाहती है सरकार
सिंघवी ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून गिरफ्तारी के तुरंत बाद मौजूदा मुख्यमंत्री को हटाने का प्रावधान करता है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष को अस्थिर करने का सबसे अच्छा तरीका पक्षपाती केंद्रीय एजेंसियों को विपक्षी मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार करने के लिए लगाना है और उन्हें चुनावी तौर पर हराने में असमर्थ होने के बावजूद, मनमाने ढंग से गिरफ्तार करके उन्हें हटाना है! सत्तारूढ़ दल के किसी भी मौजूदा मुख्यमंत्री को कभी भी हाथ नहीं लगाया गया!
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य बिहार में राहुल गांधी की 'वोट अधिकार यात्रा' से लोगों का ध्यान भटकाना है। गोगोई ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के ये विधेयक राहुल गांधी की धमाकेदार वोट अधिकार यात्रा से जनता का ध्यान भटकाने की एक हताश कोशिश के अलावा और कुछ नहीं हैं। पहले सीएसडीएस-भाजपा आईटी प्रकोष्ठ का नाटक और अब ये विधेयक। साफ है कि बिहार में बदलाव की हवा बह रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बुधवार को लोकसभा में इन तीनों विधेयकों को संसद की एक संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव भी पेश करेंगे।
