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पहलगाम हमले के बाद एक्शन मोड में मोदी सरकार, सीसीएस की बैठक में तैयार हुई रणनीति; जानें खास बातें

CCS Meeting: पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार फुल ऑन एक्शन मोड में नजर आ रही है। आतंकिस्तान से बदला लेने के लिए पीएम मोदी की अध्यक्षता में रणनीति तैयार हो रही हैं। इसी बीच आज यानी बुधवार सुबह 11 बजे से सीसीएस की बैठक हो रही है। आपको इस रिपोर्ट में बैठक से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दे देते हैं।

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फाइल फोटो।

CCS Meeting At PM Modi's Residence: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज सुबह 11 बजे सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक हुई। यह बैठक पहलगाम हमले के संदर्भ में बुलाई गई। इसके अलावा, केंद्रीय कैबिनेट की बैठक भी बुधवार को प्रस्तावित है। सीसीएस में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हुए।

प्रधानमंत्री आवास पर हो रही सीसीएस की बैठक

राजधानी दिल्ली में पीएम मोदी के आवास पर सीसीए की बैठक हुई। जिसमें शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास 7 लोक कल्याण मार्ग (एलकेएम) पहुंचे।

इससे पहले, पहलगाम हमले के अगले दिन 23 अप्रैल को सीसीएस की बैठक में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए गए थे। भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला किया था। साथ ही पाकिस्तानी नागरिकों को भी देश छोड़ने का आदेश दिया गया था। बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया था कि अगर तय मियाद के अंतर्गत पाकिस्तानी नागरिकों ने देश नहीं छोड़ा, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस आदेश के बाद पाकिस्तानी नागरिकों के देश छोड़ने का सिलसिला लगातार जारी है।

घटाई गई पाकिस्तानी उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या

सीसीएस की बैठक में केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ अपने राजनयिक संबंधों में भी कटौती करने का फैसला किया था, जिसके तहत नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या भी 55 से घटाकर 30 करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद पाकिस्तानी उच्चायोग के कई कर्मचारी देश छोड़ चुके हैं।

वहीं, पहलगाम हमले के खिलाफ केंद्र सरकार ने कई पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों पर बैन भी लगा दिया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली है। इस हमले में 26 पर्यटकों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। वहीं, जम्मू-कश्मीर सरकार ने 48 पर्यटक स्थलों को बंद करने का निर्णय लिया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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