कैश फॉर क्वेरी केस ('रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछने') में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने रिश्वतखोरी के आरोप को खारिज किया। उन्होंने आरोपों के लिए वकील जय अनंत देहाद्रई की दुश्मनी को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इस बीच मोइत्रा के साथ संसद के निचले सदन की आचार समिति की बैठक के तरीके को लेकर सवाल उठाते हुए विपक्षी सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने समिति के अध्यक्ष पर टीएमसी सांसद से व्यक्तिगत और अनैतिक सवाल पूछने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सदस्य एन उत्तम कुमार रेड्डी ने इस बाबत समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से कहा, "लोकसभा की आचार समिति के अध्यक्ष की ओर से टीएमसी सांसद से पूछे गए सवाल हमें अनैतिक लगे।" वैसे, लोकसभा की आचार समिति ने मोइत्रा और विपक्षी सदस्यों के वॉकआउट के बाद भी चर्चा जारी रखी।
दरअसल, गुरुवार (दो नवंबर, 2023) को मोइत्रा रिश्वत से जुड़े इस मामले में लोकसभा की आचार समिति के सामने पेश हुईं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद विनोद कुमार सोनकर की अध्यक्षता वाली समिति ने मोइत्रा को इस मामले में पूछताछ के लिए तलब किया था। केस के संदर्भ में वकील जय अनंत देहाद्रई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पिछले दिनों लोकसभा की आचार समिति के समक्ष पेश होकर अपने बयान दर्ज करवाए थे।
बीजेपी सांसद दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को 15 अक्टूबर को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया था कि मोइत्रा की ओर से लोकसभा में हाल के दिनों तक पूछे गये 61 प्रश्नों में से 50 प्रश्न अडाणी समूह पर केंद्रित थे। किसी समय मोइत्रा के करीबी रहे देहाद्रई ने मोइत्रा और कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के बीच अडाणी समूह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधने के लिए रिश्वत के लेनदेन के ऐसे साक्ष्य साझा किये हैं जिन्हें खारिज नहीं किया जा सकता।
टीएमसी सांसद मोइत्रा ने आरोपों को ‘ठुकराए हुए पूर्व प्रेमी’ का झूठ करार देते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अडाणी समूह उन्हें निशाना बनाने के लिए उनके पीछे पड़ा है क्योंकि वह समूह से जुड़े लेन-देन पर लगातार सवाल उठा रही हैं। हीरानंदानी ने एक हस्ताक्षरित हलफनामे में स्वीकार किया है कि मोइत्रा ने प्रधानमंत्री मोदी की ‘‘छवि खराब करने और उन्हें असहज करने’’ के लिए गौतम अडाणी पर निशाना साधा। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)
