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justice Yashwant Varma: महाभियोग से पहले जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, कैश कांड में हैं फंसे

जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। फिलहाल वो इलाहाबाद हाईकोर्ट में तैनात थे। दिल्ली हाईकोर्ट में तैनाती के दौरान जस्टिस वर्मा के घर से अधजले नोट बरामद हुए थे।

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कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। यशवंत वर्मा के खिलाफ कैश कांड में महाभियोग चलाने की तैयारी थी, इसके पहले ही यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया। यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित घर में आग लगने के दौरान काफी संख्या में जले हुए नोट बरामद हुए थे। पिछले साल 14 मार्च को नयी दिल्ली स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर जले हुए नोटों के बंडल मिलने के बाद उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय वापस भेज दिया गया था।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने लिखा पत्र

न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से जले हुए नोटों के बंडल मिलने के बाद वह महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। नौ अप्रैल को राष्ट्रपति को भेजे गए त्यागपत्र में उन्होंने कहा, ’’राष्ट्रपति महोदया, मैं आपके सम्मानित कार्यालय पर उन कारणों का बोझ नहीं डालना चाहता जिनके चलते मुझे यह पत्र प्रस्तुत करना पड़ रहा है, लेकिन अत्यंत पीड़ा के साथ मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से अपना त्यागपत्र दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।’’

justice yashwant verma.

जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा

महाभियोग की थी तैयारी

यह इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब लोकसभा की एक समिति उनके खिलाफ पद से हटाने के प्रस्ताव को लेकर जांच कर रही थी। पिछले वर्ष लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। यह जांच उनके सरकारी आवास से कथित रूप से बिना हिसाब-किताब वाली नकदी मिलने के मामले को लेकर की जा रही थी।

क्यों लाया गया था महाभियोग प्रस्ताव?

न्यायमूर्ति वर्मा पर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। मार्च में उनके नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगने की घटना के बाद वहां से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। इसके बाद तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने तीन उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की एक जांच समिति का गठन किया। समिति ने अपनी जांच पूरी करने के बाद वर्मा को प्रथम दृष्टया दोषी माना। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए संजीव खन्ना ने इस रिपोर्ट को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दिया। साथ ही उन्होंने यह सिफारिश भी की कि चूंकि वर्मा ने स्वेच्छा से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, इसलिए उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाया जाना चाहिए।

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Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमार author

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय ... और देखें

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