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सलमान खान को फिर मिली जान से मारने की धमकी, लॉरेंस के नाम से आया मैसेज

Lawrence Bishnoi Gang: सलमान खान को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली है। लॉरेंस बिश्नोई के नाम से मुंबई पुलिस की ट्रैफिक कंट्रोल सेल को बॉलीवुड एक्टर सलमान के लिए मैसेज आया। जिसमें खुलेआम उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। आपको बताते हैं कि इस मैसेज में धमकी देने वाले ने क्या लिखा है।

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सलमान खान को लॉरेंस के नाम से फिर मिली जान से मारने की धमकी।

Salman Khan again Received Death Threat: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को फिर से गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम की धमकी मिली है। इस बार भी धमकी देने वाले ने पैसों की डिमांड की है, साथ ही सलमान को मंदिर में जाकर माफी मांगने की सलाह दी है। इसमें कहा गया है कि यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। पुलिस ने ये जानकारी साझा की है।

सलमान खान को फिर लॉरेंस गैंग ने दी जान से मारने की धमकी

पुलिस सूत्रों ने मुताबिक मुंबई पुलिस की ट्रैफिक कंट्रोल सेल को लॉरेंस बिश्नोई के नाम से धमकी भरा मैसेज मिला है। ट्रैफिक कंट्रोल रूम को भेजे गए मैसेज में दावा किया गया है कि 'लॉरेंस बिश्नोई का भाई बोल रहा हूं। अगर सलमान खान जिंदा रहना चाहते हैं, तो उन्हें हमारे मंदिर में जाकर माफी मांगनी चाहिए या 5 करोड़ रुपये देने चाहिए। ऐसा न करने पर जान से मार देंगे, हमारी गैंग आज भी सक्रिय है।'

पुलिस ने मुताबिक उन्हें यह धमकी भरे मैसेज की जानकारी कल (सोमवार) आधी रात को मिला, ट्रैफिक कंट्रोल रूम में काम करने वाले अधिकारी ने इसे पढ़ा। पुलिस फिलहाल उस शख्स की तलाश कर रही है।

लगातार अभिनेता सलमान खान को मिल रही है धमकियां

ये पहली बार नहीं है जब अभिनेता सलमान खान को जानलेवा धमकी मिली है। मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कंट्रोल को इससे पहले भी कई बार मैसेज आया है, जिसमें अज्ञात शख्स ने सलमान को जान से मारने की धमकी दी। मैसेज करने वाले ने कभी 5 करोड़ तो कभी 2 करोड़ रुपये की मांग की। इससे पहले बॉलीवुड एक्टर को चेतावनी दी गई थी अगर उन्होंने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के साथ मामले को सुलझाने के लिए 5 करोड़ रुपये नहीं दिए तो उनका हश्र मारे गए मुंबई के एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी से भी बुरा होगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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