सूर्य ग्रहण 2021: सूर्य पर लगा ग्रहण, दुनिया भर में दिखा अद्भूत नजारा, भारत में भी आया नजर
सूर्य ग्रहण 2021 10 जून : साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण लगा। इसका अद्भूत नजारा उत्तरी अमेरिका, यूरोप के कुछ देशों में देखा गया और एशिया के कई बड़े हिस्सों के अलावा भारत में भी दिखा।
साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण लगा। यह दुनिया के कई हिस्सों में देखा गया। यह सूर्यग्रहण भारत में भी कुछ इलाकों में देखा गया। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण है। यह खगोलीय घटना तब होती है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। हमारे देश में सूर्यग्रहण धार्मिक मान्यताएं भी हैं। नीचे आप विस्तार से सूर्य ग्रहण के वैज्ञानिक पक्ष और धार्मिक पक्ष दोनों जान सकते हैं। विश्व में कई संगठन सूर्य ग्रहण की घटना का सीधे प्रसारण किया।
भारत में दिखा सूर्य ग्रहण
भारत में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में ही सूर्य ग्रहण आंशिक रूप से देखा गया। अरुणाचल प्रदेश में शाम 5 बजकर 52 मिनट पर जबकि लद्दाख में करीब 6 बजे ग्रहण दिखा।
इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण दिसंबर में
इस साल का पहला सूर्यग्रहण आज लगा। इस साल का दूसरा और आखिरी सूर्यग्रहण 4 दिसंबर को लगेगा। यह सूर्य ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा।
सूर्य ग्रहण की शानदार तस्वीर
अमेरिका में सूर्य ग्रहण का नजारा
नासा का साधा प्रसारण
नासा ने ट्वीट किया अद्भूत नजारा
कब दिखाई देगा रिंग ऑफ फायर
जल्द आकाश में रिंग ऑफ फायर का शानदार नजारा देख सकेंगे। धैर्य के साथ इंतजार करें। शाम के करीब 4 बजकर 52 मिनट पर आसमान में रिंग ऑफ फायर दिखाई देगा। सूर्यग्रहण
रिंग ऑफ फायर में सूर्यग्रहण का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।
भारत में सूर्यग्रहण करीब 5 घंटे का होगा
भारतीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 41 मिनट तक सूर्यग्रहण रहेगा। यानी सूर्यग्रहण करीब 5 घंटे का होगा। भारत में ग्रहण सूर्यास्त के पहले लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में दिखेगा।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या ना करें
सूर्य ग्रहण के दौरान फूल और पत्ती नहीं तोड़ना चाहिए। किसी भी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित हैं। गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं आना चाहिए। सूर्य ग्रहण के दौरान सोना नहीं चाहिए, इससे सोने वाला व्यक्ति रोगी का शिकार हो जाता है। इस दौरान भोजन बनाना या खाना भी नहीं चाहिए। हालांकि ये सभी बातें भी धार्मिक मान्यताएं हैं। वैज्ञानिक नहीं।
148 बाद बना ऐसा संयोग
अमावस्या तिथि पर शनि जयंती और सूर्य ग्रहण दोनों का ऐसा संयोग 148 वर्षों के बाद बना है। यानी 148 साल बाद ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सूर्यग्रहण लगा है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन हर साल शनि जयंती मनाई जाती है।
यहां दिखेगा रिंग ऑफ फायर
सूर्यग्रहण कब और कहां-कहां दिखेगा
भारतीय समयानुसार दिन के 1:42 बजे आंशिक सूर्य ग्रहण होगा और यह दोपहर बाद 3:30 बजे से वलयाकार रूप लेना शुरू करेगा और फिर शाम 4:52 बजे तक आकाश में सूर्य अग्नि वलय (आग की अंगूठी) की तरह दिखाई देगा। शाम करीब 6:41 बजे समाप्त होगा। यह सूर्यग्रहण आसमान में रिंग ऑफ फायर की तरह नजर आ सकता है। ग्रहण अमेरिका, यूरोप, उत्तरी कनाडा, एशिया, रूस और ग्रीनलैंड है। यह भारत में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ भागों में करीब 6 बजे के आसपास आंशिक रूप से दिखाई दे सकता है।
सूर्य ग्रहण का शानदार नजारा कुछ देर में
अब बस कुछ ही घंटों के बाद सूर्य ग्रहण शुरू होने वाला है। सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका, उत्तरी कनाडा, यूरोप और एशिया के देशों मे दिखाई देगा। सबसे शानदार नजारा यानी रिंग ऑफ फायर ग्रीनलैंड और रूस में दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य आग की रिंग की तरह कुछ देर के लिए दिखाई देता है।
ज्योतिषी ने अनिष्ट की भविष्यवाणी
ज्योतिषी का कहना है कि ऊर्जा के मूल के स्त्रोत पर ग्रहण लग जाए तो अनिष्ट होना तय है। इससे दुनिया पर काफी प्रभाव पड़ेगा। सूर्य ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव जन-जीवन और प्रकृति पर पड़ता है। देश-दुनिया में युद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
कंकणाकृति सूर्यग्रहण क्या होता है?
जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है तब सूर्य ग्रहण लगता है। आज लगने वाला सूर्य ग्रहण कंकणाकृति सूर्य ग्रहण के रुप में दिखाई देने वाला है और इसे वलयाकार सूर्य ग्रहण भी कहा जाता है। ऐसी स्थिति में सूर्य के बाहर का एरिया प्रकाशित होने के कारण ये कंगन यानी वलय के रुप में चमकता है। कंगन आकार से बने या फिर कंगन की तरह दिखने वाले इस सूर्य ग्रहण को कंकणाकृति सूर्यग्रहण कहते हैं। ग्रहण के दौरान सूर्य में छोटे-छोटे धब्बे उभरते हैं जो कंकण के आकार के होते हैं इसीलिए भी इसे कंकणाकृति सूर्यग्रहण कहा जाता है।
सूर्यग्रहण के बाद क्या करें?
ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करना जरूरी है। अपने ईष्ट देवता का ध्यान और उनके मंत्र का जप करना अच्छा रहेगा। ग्रहण के बाद अन्न का दान करना पुण्य माना जाता है। ग्रहण के पहले बने भोजन और रखे पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ताजा भोजन बना कर ही खाना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद गाय को घास, पक्षियों को दाना तथा गरीबों को वस्त्र के दान करना चाहिए। इससे आपके जीवन में तरक्की होगी।
वर्ष में कितनी बार लगता है सूर्यग्रहण?
अधिकांशत: एक वर्ष में सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। इसकी अधिकतम संख्या 5 तक हो सकती है। इस खगोलीय घटना को एक साल में 5 बार अंतिम बार वर्ष 1935 में देखा गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक अब 2206 में एक साल में 5 बार सूर्यग्रहण देखने को मिलेगा।
खंडग्रास सूर्य ग्रहण किसे कहते हैं?
सूर्य और पृथ्वी के बीच में जब चंद्रमा आता है तो सूर्य ग्रहण लगता है। लेकिन जब इस खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा सूर्य के आंशिक हिस्से को ही ढंक पाता है तो इस घटना को आंशिक सूर्य ग्रहण या खंडग्रास सूर्य ग्रहण कहते हैं। इस खगोलीय घटना में हमें सूर्य का ज्यादातर हिस्सा दिखाई देता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण किसे कहते हैं?
पूर्ण सूर्य ग्रहण किसे कहते हैं?
जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी के बहुत करीब होता है। इस स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को ढंक लेता है। पृथ्वी के करीब होने की वजह से सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर नहीं पहुंचने देता है। इस खगोलीय घटना को पूर्ण सूर्यग्रहण कहते हैं।
कैसे और कब होता है सूर्यग्रहण
सूर्य ग्रहण को लेकर नासा ने ट्वीट किया वीडियो
भारत में सूर्यग्रहण कब दिखेगा
एम पी बिरला तारामंडल के निदेशक देबीप्रसाद दुरई ने बताया कि सूर्य ग्रहण भारत में अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों से ही दिखाई देगा। इस साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में केवल अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों में ही सूर्यास्त से कुछ समय पहले दिखाई देगा। अरुणाचल प्रदेश में दिबांग वन्यजीव अभयारण्य के पास से शाम करीब 5:52 बजे इस खगोलीय घटना को देखा जा सकेगा। वहीं, लद्दाख के उत्तरी हिस्से में, जहां शाम लगभग 6.15 बजे सूर्यास्त होगा, शाम करीब 6 बजे सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।
अमेरिका, यूरोप और एशिया के अन्य इलाके में कब दिखेगा सूर्यग्रहण
एम पी बिरला तारामंडल के निदेशक देबीप्रसाद दुरई ने कहा कि उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया के बड़े क्षेत्र में सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। यह उत्तरी अलास्का, कनाडा, कैरिबियन देश और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी देखा जा सकेगा।




