Gyanvapi Masjid Case: वाराणसी कोर्ट का फैसला- कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को हटाया, सर्वे टीम को 2 दिन का समय दिया
Gyanvapi Masjid Case Verdict News Live Updates: ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वाराणसी कोर्ट ने सर्वे के कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को हटा दिया है। रिपोर्ट लीक करने पर ये कार्रवाई हुई है। इसके अलावा सर्वे टीम को रिपोर्ट जमा करने के 2 दिन का वक्त भी दिया गया है। ज्ञानवापी मस्जिद रिपोर्ट सर्वे पर असिस्टेंट कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह ने कहा कि कोर्ट ने रिपोर्ट जमा करने के लिए दो दिन का समय दिया है। अधिवक्ता-आयुक्त अजय कुमार मिश्रा थोड़ा बहुत सहयोग नहीं कर पा रहे थे।
Gyanvapi Masjid Case News Live Updates: हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील विष्णु जैन ने कहा है कि कल जब वहां पर सर्वे हो रहा था तो वहां पर एक वजू खाने के बीच में कुएं जैसे दीवार देखी। हमने पानी को कम करने का आग्रह किया। उसके बाद जब कुएं की दीवार के पास पहुंचे तो हमने देखा कि वहां एक ढाई से तीन फुट लंबा शिवलिंग है। हमने कोर्ट में एप्लीकेशन दी और हमारे द्वारा मांग की गई कि यह बहुत बड़ा सबूत है और इसे सुरक्षा प्रदान की जाए। न्यायालय ने CRPF के कमांडेंट से कहा कि वे वहां पर तैनात रहेंगे और सबूत को सुरक्षा प्रदान करेंगे। असिस्टेंट कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह ने कहा कि हमारी रिपोर्ट 50% तक तैयार हो गई है। रिपोर्ट पूरी तैयार नहीं है इसलिए आज कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे। विशेष सहायक आयुक्त एडवोकेट विशाल सिंह ने कहा कि मैंने अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी है। समय के अंतर्गत रिपोर्ट को कोर्ट में दाखिल कर दिया जाएगा। अगर देरी होती है तो देखा जाएगा। हिंदू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि कमीशन की कार्रवाई में जो शिवलिंग मिला है उसको मलबे से ढक दिया गया है। 3-4 फीट ही दिखाई दे रहा है। हम लोगों की संभावना है की वो और नीचे है। मलबे को हटाकर और दरवाजे को खोलकर स्पष्ट शिवलिंग की रिपोर्ट आ जाए।
जो कुछ हुआ है वो सिर्फ विशाल की वजह से हुआ: अजय मिश्रा
पूर्व कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा ने खुद को हटाए जाने पर कहा कि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है जिससे मामले की गोपनीयता का पता चले। एडवोकेट विशाल सिंह के आरोपों के चलते मुझे हटाया गया। मैं कोर्ट के आदेश का सम्मान करूंगा। जो कुछ हुआ है वो सिर्फ विशाल की वजह से हुआ है।
मस्जिद में शिवलिंग मिलने का दावा, मुस्लिम पक्ष ने नकारा
अजय मिश्रा के ही नेतृत्व में ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कार्य सोमवार को पूरा किया गया था। सर्वे के अंतिम दिन हिन्दू पक्ष ने दावा किया था कि मस्जिद के वजूखाने में एक शिवलिंग मिला है। मगर मुस्लिम पक्ष ने यह कहते हुए इस दावे को गलत बताया था कि मुगल काल की तमाम मस्जिदों में वजूखाने के ताल में पानी भरने के लिये नीचे एक फौव्वारा लगाया जाता था और जिस पत्थर को शिवलिंग बताया जा रहा है, वह फौव्वारे का ही एक हिस्सा है।
अजय मिश्रा पर लगा था पक्षपात का आरोप
मुस्लिम पक्ष मिश्रा पर पहले से ही पक्षपात का आरोप लगाता रहा है। उसने सात मई को सर्वे के दूसरे ही दिन मिश्रा पर आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की अर्जी अदालत में दी थी। हालांकि अदालत ने इसे नामंजूर करते हुए मिश्रा के सहयोग के लिये एक विशेष और एक सहायक एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की थी।
कोर्ट ने रिपोर्ट जमा करने के लिए दो दिन का समय दिया
ज्ञानवापी मस्जिद रिपोर्ट सर्वेक्षण पर सहायक न्यायालय आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने कहा कि कोर्ट ने रिपोर्ट जमा करने के लिए दो दिन का समय दिया है। वह (एडवोकेट-आयुक्त अजय कुमार मिश्रा) सहयोग नहीं कर रहे थे। वाराणसी में कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष सहायक आयुक्त एडवोकेट विशाल सिंह ने कहा कि हमने कोर्ट से दो दिन का समय मांगा था। कोर्ट ने हमें रिपोर्ट जमा करने के लिए दो दिन का समय दिया है।
वाराणसी कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को कार्यमुक्त किया
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सर्वे टीम को 2 दिन का समय मिला
कोर्ट ने सर्वे टीम को रिपोर्ट फाइल करने के लिए 2 दिन का समय दे दिया है।
ज्ञानवापी मामले में बस थोड़ी देर में आएगा वाराणसी कोर्ट का अहम फैसला
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सर्वे रिपोर्ट पेश करने पर शाम 4 बजे फैसला
सर्वे रिपोर्ट पेश करने के लिए दो और दिन की मांग
वाराणसी की अदालत में ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे की रिपोर्ट पेश करने के लिए कोर्ट कमिश्नर ने दो अतिरिक्त दिन मांगा है। कोर्ट कमिश्नर का कहना है कि पूरे दस्तावेजों के संकलन के लिए थोड़ा समय लग रहा है, लिहाजा माननीय अदालत उन्हें दो और दिन वक्त देने का कष्ट करें।
वाराणसी कोर्ट में सुनवाई शुरू
वाराणसी की अदालत में ज्ञानवापी मुद्दे पर सुनवाई शुरू हो चुकी है। अदालत में सरकारी वकील की तरफ से रिकॉल अर्जी देकर कुछ मांग पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की गुजारिश की गई है तो सुप्रीम कोर्ट में भी मुस्लिम पक्षकारों की अपील पर किसी भी समय सुनवाई शुरू हो सकती है। सुप्रीम अदालत में सर्वे से संबंधित मामला 40वें नंबर पर सूचीबद्ध था। अदालत ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
रिकॉल अर्जी दाखिल
यूपी सरकार के वकील ने वुजुखाना को सील करने के सिविल कोर्ट के आदेश के खिलाफ रिकॉल अर्जी दाखिल की।वाराणसी में जिला सरकारी वकील महेंद्र प्रसाद पांडे ने वुजुखाना को सील करने के सिविल कोर्ट के कल के आदेश के खिलाफ एक रिकॉल अर्जी दाखिल की है। वुजुखाने की मछलियों को गंगा में छोड़ने और शौचालय को शिफ्ट करने की मांग की गई है। अर्जी में कहा गया है कि अदालत के आदेश से वजूखाना को सील किया गया है को अदालत को तीन बिंदुओं पर विचार करना चाहिए। मछलियों की जिंदगी भी अहम लिहाजा उनके बारे में विचार हो, बड़ी संख्या में नमाजी आते है लिहाजा उनके लिए शौचालय की भी व्यवस्था हो। इसके अलावा वजूखाना के किनारे पानी के पाइपलाइन पर भी विचार करना चाहिए।
सर्वे की अवधि बढ़ाई जाए- हिंदू पक्ष
हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी में सर्वे की अवधि बढ़ाने की मांग की है। हिंदू पक्ष का दावा है कि इससे खुदाई से सच्चाई सामने आएगी। इससे पहले काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ने भी खुदाई की मांग की है। इस बीच कोर्ट कमिश्नरों ने कहा कि हम आज (मंगलवार) अदालत में रिपोर्ट नहीं जमा कर रहे हैं, क्योंकि यह तैयार नहीं है। हम अदालत से दो-तीन दिन का अतिरिक्त समय मांगेंगे। अदालत जो भी समय देगी, हम उसमें रिपोर्ट पेश करेंगे।”इससे पहले, हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने सोमवार को दावा किया था कि अदालत द्वारा अनिवार्य वीडियोग्राफी-सर्वे कार्य के दौरान मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग पाया गया है।एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को हिंदू पक्ष की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के उस हिस्से को सील करने का आदेश दिया था, जहां कथित तौर पर शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है।उधर, ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली कमेटी के एक सदस्य ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा था, “मुगल काल की मस्जिदों में वजू खाने के अंदर फव्वारा लगाए जाने की परंपरा रही है। उसी का एक पत्थर आज सर्वे में मिला है, जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है।”
रिपोर्ट पेश करने के लिए दो दिन और मांग सकते हैं कोर्ट कमिश्नर
सूत्रों के मुताबिक ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे रिपोर्ट को पेश करने के लिए दो दिन का समय मांगा गया है। इस मसले पर अब दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी। एडवोकेट विशाल सिंह ने दो दिन का समय मांगा है। संयुक्त रूप से रिपोर्ट पेश की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में अब से कुछ देर बाद सुनवाई
अब से कुछ देर बाद सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकारों की अर्जी पर सुनवाई होने वाली है। मुस्लिम पक्षकारों ने अदालत में पूजा अधिनियम 1991 का हवाला देते हुए सर्वे पर रोक लगाने की मांग की है। बता दें कि वाराणसी की स्थानीय अदालत के निर्देश पर 16 मई तक सर्वे का काम संपन्न हुआ था। 17 मई को सर्वे रिपोर्ट पेश करने के निर्देश थे।लेकिन इस मामले में अभी संशय बरकरार है।
नंबर 40 पर ज्ञानवापी मस्जिद केस सूचीबद्ध
ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इस मामले को 40 नंबर पर सूचीबद्ध किया गया है। इस समय केस नंबर 2 पर सुनवाई चल रही है। इस लिहाजा से इस केस के आने में देरी होगी। इस केस को प्राथमिकता के आधार पर सुनने से अदालत ने इनकार किया है। बता दें कि मुस्लिम पक्षकारों में पूजा अधिनियम 1991 का हवाला देते हुए वाराणसी की अदालत के फैसले को चुनौती दी है।
काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट का बड़ा बयान
काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से पहली बड़ी टिप्पणी आई है। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नागेंद्र पांडे ने कहा कि ये मंदिर ही है . जो ढांचा अभी वहां पर खड़ा है वो भी मंदिर का ही हिस्सा है। पुराणों में लिखा है वहीं मंदिर है और जो मूर्ति मिली है तो इससे और ज्यादा स्थापित हो जाता है कि वो मंदिर ही है और इसपर विवाद नहीं होना चाहिए। बता दें कि इस विषय पर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अदालत में रिपोर्ट पेश किए जाने से पहले ही बयानबाजी के जरिए यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि तहखाने में शिवलिंग मिला है।
वाराणसी की कोर्ट में आज पेश नहीं की जाएगी रिपोर्ट
वाराणसी की स्थानीय अदालत के निर्देश पर 17 मई को सर्वे रिपोर्ट पेश की जानी थी। लेकिन कोर्ट कमिश्नरों में से एक अजय प्रताप सिंह का कहना है कि आज रिपोर्ट पेश कर पाना संभव नहीं होगा। रिपोर्ट पेश करने के लिए अदालत से दूसरी तारीख की मांग करेंगे। इस बीच एक और कोर्ट कमिश्नर का कहना है कि रिपोर्ट तैयार है, लेकिन दोबारा जांच की जाएगी।
सुनवाई से पहले सियासी बयानबाजी
ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्षकार की अपील पर अब से कुछ देर बाद सुनवाई होने जा रही है। लेकिन उससे पहले सियासी बयानबाजी भी हो रही है। ओवैसी का कहना है कि कयामत तक मस्जिद रहेगी तो केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि नंदी की तपस्या सफल हुई। ओवैसी और कांग्रेस का कहना है कि जिसे शिवलिंग बताया जा रहा है वो फव्वारा है। लेकिन हिंदू पक्ष के वकील ने कुछ तकनीकी सवाल भी उठाए हैं।
हां, मैंने शिवलिंग देखा- विष्णु जैन
विष्णु जैन ने वायरल वीडियो उसी का है जिस स्थान पर उन्होंने शिवलिंग देखा। उनका कहना है कि वह कुछ सीढ़ियों से नीचे उतरे और इस स्थान पर पहुंचे। यह पहले के नक्शों से भी मेल खाता है जो शिवलिंग का स्थान दिखाते हैं। सुरक्षा की गुहार लगाने के लिए कोर्ट गए क्योंकि यह महत्वपूर्ण सबूत है। बता दें कि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि दरअसल जो पत्थर मिला है वो शिवलिंग नहीं बल्कि फव्वारा है। हालांकि हिंदू पक्ष के वकील का कहना है कि फव्वारा होता तो प्लंबिंग से जुड़े सामान भी मिलते।
'अंजुमन कमेटी की अपील का मतलब नहीं'
सुप्रीम कोर्ट के सामने अंजुमन कमेटी की अपील का कोई मतलब नहीं रह गया है, क्योंकि उन्होंने मूल रूप से अधिवक्ता आयुक्त के सर्वेक्षण और नियुक्ति को चुनौती दी थी जिसे बाद में अदालत ने स्पष्ट किया था और आदेशों का पालन किया गया था। इसलिए वे कुछ को चुनौती दे रहे हैं जिनका उन्होंने अनुपालन किया है।पूजा स्थलों पर अधिनियम- एक उपखंड दो है जो 1947 में जगह के धार्मिक चरित्र की बात करता है। उदाहरण के लिए, अगर मैं एक मस्जिद में एक मूर्ति रखता हूं तो वह मंदिर नहीं बनता है और इसके विपरीत। सर्वे में हमने और क्या पाया, मैं इसका खुलासा नहीं कर रहा हूं क्योंकि मामला एडवोकेट कमिश्नर और कोर्ट के सामने है। केवल शिवलिंग की बात की क्योंकि इसे एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सुरक्षा की आवश्यकता है।शिवलिंग के फव्वारा होने के दावे पर- अगर फव्वारा होता तो पाइप और प्लंबिंग आदि होते लेकिन ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।
शिवलिंग या फव्वारा, बयानबाजी तेज
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन का दावा है कि ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिला है। इसके लिए उन्होंने अदालत में अर्जी भी दी है। लेकिन मुस्लिम पक्ष का कहना है कि अगर यह सच है तो यह बात कोर्ट कमिश्नर की तरफ से क्यों नहीं बताई गई। लेकिन एआईएमआईएम मुखिया ओवैसी का कहना है कि हर मस्जिद में फव्वारा होता है। दरअसल कुछ संगठन एक अलग तरह के नैरेटिव को पेश कर रहे हैं। देश में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई
वाराणसी की एक स्थानीय अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर किए गए सर्वे वीडियोग्राफी में सोमवार को कथित रूप से एक शिवलिंग पाया गया और इसके बाद अदालत के निर्देश पर वजू खाने को सील कर दिया गया है।हालांकि मुस्लिम पक्ष इस दावे को गलत ठहराते हुए कह रहा है कि मुगल काल की बनी सभी मस्जिदों के वजू खाने के अंदर फव्वारा लगाया जाता था। उसका कहना है कि जिस पत्थर को शिवलिंग बताया जा रहा है वह उसी फव्वारे का एक हिस्सा है।
'अदालत का आदेश ज्यादती'
उन्होंने कहा, "यह आदेश ज्यादती है और कानून का उल्लंघन भी है जिसकी एक अदालत से हरगिज़ उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत के इस अमल ने इंसाफ के तकाजों को घायल कर दिया है, इसलिए सरकार को चाहिए कि फौरी तौर पर इस फैसले पर अमल को रोके, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करे और 1991 के कानून के मुताबिक तमाम मजहबी स्थलों का संरक्षण करे।"रहमानी ने मस्जिद के अंदर मंदिर होने की हिंदू पक्ष की दलीलों की तरफ इशारा करते हुए कहा, "अगर ऐसी खयाली दलीलों के आधार पर इबादतगाहों की हैसियत बदली जाएगी तो पूरा मुल्क अफरा-तफरी का शिकार हो जाएगा, क्योंकि कितने ही बड़े-बड़े मंदिर बौद्ध और जैन इबादतगाहों को तब्दील करके बनाए गए हैं और उनके प्रत्यक्ष निशान भी मौजूद हैं। मुसलमान इस जुल्म को हरगिज बर्दाश्त नहीं कर सकते। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हर स्तर पर इस अन्याय का मुकाबला करेगा।"
'सांप्रदायिक उन्माद बढ़ाने की साजिश'
भारत में मुसलमानों के प्रमुख संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में कथित रूप से शिवलिंग मिलने के बाद अदालत के आदेश पर मस्जिद का वजू खाना बंद कराए जाने को नाइंसाफी करार देते हुए कहा कि यह पूरा घटनाक्रम सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने की एक साजिश से ज्यादा कुछ नहीं है।बोर्ड के महासचिव खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने सोमवार देर रात जारी एक बयान में कहा, "ज्ञानवापी मस्जिद, मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी। इसको मंदिर करार देने की कोशिश सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने की एक साजिश से ज्यादा कुछ नहीं है। यह संवैधानिक अधिकारों और कानून के खिलाफ है।"उन्होंने कहा, "वर्ष 1937 में दीन मोहम्मद बनाम स्टेट सेक्रेटरी मुकदमे में अदालत ने जबानी गवाही और दस्तावेजों के आधार पर यह बात तय कर दी थी कि यह पूरा अहाता (ज्ञानवापी मस्जिद परिसर) मुस्लिम वक्फ की मिल्कियत है और मुसलमानों को इसमें नमाज पढ़ने का हक है। अदालत ने यह भी तय कर दिया था कि कितना हिस्सा मस्जिद है और कितना हिस्सा मंदिर है। उसी वक्त वजू खाने को मस्जिद की मिल्कियत स्वीकार किया गया था।"

