Amit Shah on China: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मौजूदा समय में सुई की नोंक के बराबर हिंदुस्तान की धरती को कोई कब्जा नहीं सकता है। यह हमारे देश के लोगों (अरुणाचल के स्थानीय लोग) का जज्बा था, जो उन्होंने 1962 में ड्रैगन को अपने पैर पीछे करने पर मजबूर कर दिया था। हालांकि, चीन की ओर से गृह मंत्री शाह के अरुणाचल दौरे की आलोचना की गई है।
ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी माने जाने वाले बीजेपी नेता ने सोमवार (10 अप्रैल, 2023) को अरुणाचल प्रदेश में कहीं। किबिथू में हुई जन सभा के दौरान वह बोले- वह समय चला गया, जब भारतीय भूमि पर कोई भी अतिक्रमण कर सकता था। आज सुई की नोंक के बराबर जमीन पर भी कोई कब्जा नहीं कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा- अरुणाचलवासियों के जोश ने साल 1962 में चीन को कदम वापस खींचने के लिए मजबूर कर दिया था। पहले के समय से उलट अब सीमावर्ती इलाकों के लोग कहते हैं कि वे भारत के आखिरी नहीं, पहले गांव के निवासी हैं...पीएम मोदी ने विमर्श बदल दिया है।
बकौल शाह, "मैं किबिथू के उन शहीदों को श्रद्धांजलि देता हूं, जिन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध में संसाधनों के अभाव में भी वीरता से लड़ाई लड़ी। सीमावर्ती क्षेत्र मोदी सरकार की पहली प्राथमिकता हैं।"
उधर, चीन की ओर से शाह के अरुणाचल दौरे की कड़ी आलोचना की गई। बीजिंग में प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय जब चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन से जब शाह के दौरे से जुड़ा सवाल हुआ तो वह बोले, ‘‘जंगनन, (अरुणाचल प्रदेश के लिए चीनी नाम) चीन का क्षेत्र है। इस क्षेत्र में भारतीय अधिकारियों की गतिविधियों से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन होता है और यह सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति के लिए अनुकूल नहीं हैं। हम इसका दृढ़ता से विरोध करते हैं।"
इंडिया ने बीते हफ्ते चीन की ओर से अरुणाचल की कुछ जगहों का नाम बदलने के कदम को सिरे से खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इस बाबत कहा था कि ऐसा पहली बार नहीं है कि चीन ने ऐसा प्रयास किया हो और ‘‘हम पहले की तरह इसे खारिज करते हैं। हम पहले भी कह चुके हैं कि हम ऐसे प्रयासों (चीन के) को खारिज करते हैं और हम फिर से यही दोहराते हैं। हम अपने रूख पर टिके हुए है और ‘गढ़े’ गए नाम रखने से यह हकीकत बदल नहीं जाएगी। ’’ (एएनआई, पीटीआई और भाषा इनपुट्स के साथ)
