देश

पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की संभावना नहीं, इस्लामाबाद में SCO की बैठक से पहले बोले जयशंकर

S Jaishankar Pakistan Visit: पाकिस्तान 15 और 16 अक्टूबर को एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद (सीएचजी) की बैठक की मेजबानी कर रहा है। भारत ने शुक्रवार को यह ऐलान किया था कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अक्टूबर के मध्य में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिये इस्लामाबाद जायेंगे।

Image

विदेश मंत्री एस जयशंकर

S Jaishankar Pakistan Visit: पाकिस्तान दौरे को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इस्लामाबाद में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के अतिरिक्त पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बैठक की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, वह एक बहुपक्षीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिये पाकिस्तान जा रहे हैं, न कि भारत-पाक संबंधों पर चर्चा करने के लिए। बता दें, भारत ने शुक्रवार को यह ऐलान किया था कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अक्टूबर के मध्य में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिये इस्लामाबाद जायेंगे। इसके बाद जयशंकर का यह बयान आया है।

विदेश मंत्री ने कहा, मैं इस महीने के मध्य में पाकिस्तान जाने वाला हूं और वह एससीओ शासनाध्यक्षों की बैठक के लिए है। आम तौर पर, प्रधानमंत्री राष्ट्राध्यक्षों की उच्च स्तरीय बैठकों में जाते हैं, और मंत्रियों में से एक सरकार प्रमुखों की बैठक के लिए जाता है, इसलिए यह परंपरा के अनुरूप है। जयशंकर ने कहा, ऐसा इसलिए हो रहा है कि यह बैठक पाकिस्तान में हो रही है, क्योंकि हमारी तरह वे भी अपेक्षाकृत नए सदस्य हैं। पाकिस्तान 15 और 16 अक्टूबर को एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद (सीएचजी) की बैठक की मेजबानी कर रहा है।

नौ साल बाद पहली बाद विदेश मंत्री का पाकिस्तान दौरा

लगभग नौ वर्षों में यह पहला मौका है जब भारत के विदेश मंत्री पाकिस्तान जायेंगे। कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से सीमापार आतंकवाद को लेकर दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध ठंडे बने हुए हैं। बातचीत के दौरान जयशंकर से पूछा गया कि क्या वह एससीओ बैठक के लिए पाकिस्तान यात्रा की तैयारी कर रहे हैं और इससे उनकी क्या उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा, क्या मैं इसके लिए योजना बना रहा हूं। मेरे पेशे में आप उन सभी चीजों के लिए योजना बनाते हैं जो आप करने जा रहे हैं, और उन बहुत सी चीजों के लिए भी जो आप नहीं करने जा रहे हैं, और जो हो सकती हैं, आप उनके लिए भी योजना बनाते हैं। उन्होंने कहा, इसलिए, मुझे उम्मीद है कि मीडिया की इसमें काफी रुचि होगी, क्योंकि रिश्ते की प्रकृति ही ऐसी है... मुझे लगता है कि हम इससे निपट लेंगे।

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर नहीं होगी चर्चा

विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी यात्रा एक बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिए है, मैं वहां भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने नहीं जा रहा हूं, मैं वहां एससीओ के एक अच्छे सदस्य के तौर पर जा रहा हूं। उन्होंने कहा, लेकिन, मैं क्योंकि एक विनम्र और सभ्य व्यक्ति हूं, इसलिए मैं उसी के अनुसार व्यवहार करूंगा। बता दें, एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किर्गिज़ गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपतियों द्वारा एक शिखर सम्मेलन में की गई थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके स्थायी सदस्य बने।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!

संबंधित खबरें