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राज्यसभा चुनाव: बिहार में तेज होगी सियासी सरगर्मी, महागठबंधन को झटका देने की तैयारी में NDA, समझें समीकरण

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में दीपक प्रकाश की पार्टी के पास केवल चार विधायक हैं, जिनमें उनकी मां स्नेहलता भी शामिल हैं। ऐसे में उन्हें जेडीयू और भाजपा जैसे बड़े सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर रहना होगा। बाकी दो सीटें प्रमुख विपक्षी दल आरजेडी के पास हैं, जिसके पास अब सिर्फ 25 विधायक रह गए हैं, जो राज्यसभा सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल से काफी कम है।

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बिहार में राज्य सभा चुनाव की सरगर्मी

Photo : PTI

Rajya Sabha Election in Bihar: बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में सियासी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। इन पांच में से तीन सीटें सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास हैं और माना जा रहा है कि वह विपक्ष की शेष दो सीटों पर भी कब्जा करने की स्थिति में है। यानी राज्यसभा चुनाव में एनडीए खेमा खेला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बिहार विधानसYe चुनाव में हार के बाद, इंडिया गठबंधन के लिए ये एक और बड़ा झटका होगा। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी और मतदान 16 मार्च को होगा।

दो सीटें जनता दल यूनाइटेड के पास

दो सीटें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पास हैं। दोनों मौजूदा सांसद - केंद्रीय मंत्री और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर व राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह - लगातार दूसरे कार्यकाल में हैं। गौरतलब है कि जदयू प्रमुख और राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कुछ साल पहले पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को लगातार तीसरा कार्यकाल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। पार्टी ने उस समय यह तर्क दिया था कि लगातार दो से अधिक कार्यकाल के लिए किसी को राज्यसभा नहीं भेजना उसकी नीति है। हालांकि इस बार अपवाद किया जाएगा या नहीं, इस पर पार्टी सूत्र भी चुप्पी साधे हुए हैं, क्योंकि नीति का पालन करने पर दोनों मौजूदा सांसद अपने संवैधानिक पद खो देंगे।

तीसरी सीट उपेंद्र कुशवाहा के पास

एनडीए की तीसरी सीट उपेंद्र कुशवाहा के पास है, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। वह 2025 में भाजपा के समर्थन से उपचुनाव में राज्यसभा पहुंचे थे। यह उपचुनाव विवेक ठाकुर के लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद हुआ था। हालांकि, कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा अहम सहयोगी पार्टी है, जो कोइरी जैसे प्रभावशाली पिछड़े वर्ग के वोटों का दावा करती है, लेकिन एनडीए के सूत्र मानते हैं कि कुशवाहा को पर्याप्त राजनीतिक लाभ मिल चुका है, उनके पुत्र दीपक प्रकाश को विधायक या विधान परिषद सदस्य न होते हुए भी, राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिल चुकी है।

दीपक प्रकाश की पार्टी के पास केवल चार विधायक

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में दीपक प्रकाश की पार्टी के पास केवल चार विधायक हैं, जिनमें उनकी मां स्नेहलता भी शामिल हैं। ऐसे में उन्हें जेडीयू और भाजपा जैसे बड़े सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर रहना होगा। बाकी दो सीटें प्रमुख विपक्षी दल आरजेडी के पास हैं, जिसके पास अब सिर्फ 25 विधायक रह गए हैं, जो राज्यसभा सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल से काफी कम है। आरजेडी के एक राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता हैं जो लालू प्रसाद के करीबी हैं। गुप्ता लगातार पांचवें कार्यकाल में हैं। दूसरी सीट पर पटना के कारोबारी अमरेंद्र धारी सिंह हैं, जिनकी भूमिहार जैसे ऊंची जाति के मतदाताओं में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

एक उम्मीदवार को जीत के लिए 40 वोटों की जरूरत

राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित के अनुसार, एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 40 वोटों की जरूरत होगी। पिछले नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटें मिली थीं, जबकि आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन को कुल मिलाकर 35 सीटों पर ही सिमटना पड़ा था। हालांकि, राज्यसभा की जिन पांच सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से फिलहाल कोई भी भाजपा के पास नहीं है, जबकि 89 विधायकों के साथ वह विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है।

बिहार में सियासी सरगर्मी

बिहार में सियासी सरगर्मी

नितिन नबीन को मिल सकती है जगह

अटकलें हैं कि भाजपा के उम्मीदवारों में एक नाम नितिन नबीन का हो सकता है, जिन्हें पिछले महीने पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। नबीन ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद दिसंबर में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन वह अभी भी बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। माना जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों को देखते हुए वह अपनी सीट छोड़ सकते हैं। एनडीए में एक और दावेदार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) हो सकती है, जिसके प्रमुख केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान हैं। पार्टी ने पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में 28 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं, जिनमें से दो विधायकों को राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

चिराग पासवान की नजरें भी लगीं

चिराग पासवान अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि एनडीए के बड़े सहयोगी उनके राजनीतिक महत्व को देखते हुए उन्हें समायोजित करेंगे। चिराग का मानना है कि एनडीए में उनकी मौजूदगी से दुसाध समुदाय के वोट मिलते हैं, जो दलितों में प्रभावशाली माने जाते हैं। इस बीच, एनडीए सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव से पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की ओर से भी असंतोष की आवाज उठ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, मांझी का मानना है कि उनकी पार्टी को उचित हिस्सेदारी नहीं मिली है। हालांकि, मांझी के पुत्र संतोष, जो भाजपा के समर्थन से विधान परिषद सदस्य बने थे, राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। पार्टी का दावा है कि उसे मुसहर समुदाय का समर्थन प्राप्त है, जो दलितों में सबसे वंचित माने जाते हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के पास विधानसभा में पांच विधायक हैं, जिनमें संतोष की पत्नी और सास भी शामिल हैं।

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अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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