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बिहार के ग्रामीण इलाकों में 700 नए पुल बनाएगी सरकार; चुनाव से पहले नीतीश के मंत्री ने खोला 'पिटारा'

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने अपना पिटारा खोल दिया है। चुनावी मौसम में घोषणाओं का सिलसिला तेज हो चुका है। इसी बीच नीतीश कुमार की कैबिनेट में मंत्री ने ऐलान किया है कि बिहार सरकार 2025-26 में ग्रामीण क्षेत्रों में 700 नये छोटे पुल बनाएगी। आपको तफसील से सबकुछ बताते हैं।

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नीतीश कुमार की सरकार ने चुनाव से पहले किया बड़ा ऐलान।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Bihar Politics: वो कहते हैं न राजनीति की बारीकियों को समझना हर किसी के वश की बात नहीं है, और बात जब बिहार के सियासत की हो रही हो, फिर तो पूछिए ही मत। सूबे में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे लेकर सत्ताधारी पार्टी समेत तमाम पार्टियों के सियासतदानों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। इस बीच नीतीश कुमार की सरकार ने एक बड़ा ऐलान किया है, चुनाव से पहले ये फैसला बेहद अहम भूमिका अदा कर सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में 700 नये छोटे पुल बनाएगी सरकार

बिहार सरकार में ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्ल्यूडी) मंत्री अशोक चौधरी ने को कहा कि राज्य सरकार अगले वित्तीय वर्ष में ग्रामीण क्षेत्रों में 700 नये छोटे पुल बनाएगी। मंत्री ने वर्ष 2025-26 के लिए आरडब्ल्यूडी के 11,101.64 करोड़ रुपये के बजट प्रस्ताव पेश करते हुए यह बयान दिया। अगले वित्तीय वर्ष के लिए विभाग का बजट विधानसभा द्वारा ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

मंत्री ने कहा, 'वर्ष 2025-26 में विभाग राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में 3,000 करोड़ रुपये की लागत से 700 नये छोटे पुलों का निर्माण करेगा।' उन्होंने कहा कि राज्य के भीतर ग्रामीण संपर्क में सुधार के उद्देश्य से बिहार सरकार ने पहले से बिना संपर्क पथ वाले बस्तियों तक हर मौसम में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कई ग्रामीण सड़क विकास योजनाएं शुरू की हैं।

इसे लेकर क्या है बिहार सरकार का पूरा प्लान?

मंत्री ने कहा कि आने वाले महीनों में सभी ऐसे बस्तियों को उच्च गुणवत्ता वाली ग्रामीण सड़कों से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (एमएमजीएसवाई) के तहत विभाग ने वर्ष 2024-25 में अब तक 764 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया है जबकि वर्ष 2025-26 में विभाग अतिरिक्त 8,600 किलोमीटर सड़कों का निर्माण करेगा।

मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, 'ग्रामीण सड़क बुनियादी ढांचे का निर्माण और सुधार लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है, आर्थिक विस्तार को बढ़ावा देता है और शहरी और ग्रामीण समुदायों के बीच की खाई को पाटता है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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