Bakrid 2026: बकरीद से पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) ने पश्चिम बंगाल सरकार के एक अहम फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने राज्य सरकार के उस नोटिस को मंजूरी दी है, जिसमें ईद उल-अजहा के दौरान पशु वध से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए थे। यह नोटिस 13 मई 2026 को जारी किया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि गाय की कुर्बानी इस्लाम या बकरीद का जरूरी हिस्सा नहीं है। इसलिए राज्य सरकार जनहित और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस पर नियंत्रण लगा सकती है।
खुले में या सार्वजनिक जगहों पर पशुओं की कुर्बानी नहीं- अदालत
अदालत ने यह भी कहा कि खुले में या सार्वजनिक जगहों पर पशुओं की कुर्बानी नहीं दी जा सकती। इसके लिए केवल तय और सुरक्षित स्थानों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। इस मामले में कुछ लोगों ने पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह फैसला धार्मिक परंपराओं के खिलाफ है। लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी मांग को खारिज कर दिया और किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि अन्य पशुओं की कुर्बानी से जुड़ी छूट के मामलों पर जल्द फैसला लिया जाए।
कोर्ट ने सरकार को दी ये सलाह
कोर्ट ने कहा कि सरकार को लोगों की धार्मिक भावनाओं और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाकर काम करना चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार पहले ही पशु वध को लेकर कई नियम लागू कर चुकी है। सरकार ने आदेश दिया है कि किसी भी पशु की कुर्बानी से पहले मेडिकल जांच जरूरी होगी। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों से प्रमाण पत्र लेना भी अनिवार्य किया गया है। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य में बकरीद को लेकर प्रशासन और ज्यादा सतर्क हो गया है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
