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बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में आया बड़ा अपडेट, फडणवीस ने बताया- कुछ सुराग मिले

Maharashtra News: अजित पवार गुट के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के पीछे का असल मकसद क्या है, क्या इस वारदात को लेकर कोई बड़ा अपडेट सामने आया है? महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया है कि इस हत्याकांड मामले में कुछ सुराग मिले हैं, लेकिन वो उनका खुलासा अभी नहीं कर सकते हैं।

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बाबा सिद्दीकी मर्डर केस पर क्या बोले देवेंद्र फडणवीस?

Baba Siddique Murder Case: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि पुलिस को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के सिलसिले में कुछ सुराग हाथ लगे हैं। राज्य के गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे फडणवीस ने गोंदिया जिले में संवाददाताओं से कहा, 'हत्या की विभिन्न कोणों से जांच की जा रही है लेकिन पुलिस इस बारे में बाद में जानकारी देगी।'

फडणवीस के बहुत करीबी थे बाबा सिद्दीकी!

इस वर्ष फरवरी में कांग्रेस छोड़ने के बाद अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा में शामिल हुए सिद्दीकी (66) को मुंबई के बांद्रा इलाके के खेर नगर में उनके बेटे के कार्यालय के ठीक बाहर तीन लोगों ने घेर कर गोली मार दी। सिद्दीकी को लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। फडणवीस ने कहा, 'इस भयावह और दुखद घटना से हम सभी स्तब्ध हैं। बाबा सिद्दीकी मेरे बहुत करीबी थे, हमने कई वर्षों तक साथ काम किया था।'

सुराग के बारे में क्या बोले डिप्टी सीएम फडणवीस?

भाजपा नेता ने कहा, 'कुछ सुराग मिले हैं लेकिन मैं अभी उनका खुलासा नहीं कर सकता। हमले के पीछे कुछ पहलू भी मिले हैं लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस इस बारे में जानकारी देगी।' राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस घटना की जिम्मेदारी लेने और मंत्रियों को पद छोड़ने की जरूरत है।

क्या लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने दिया वारदात को अंजाम

फडणवीस ने शरद पवार की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर कहा, 'इस तरह की गंभीर घटनाओं के बाद भी उन्हें (शरद पवार) केवल सत्ता हासिल करने की इच्छा है। उनकी नजर सत्ता पर है जबकि हमारी नजर महाराष्ट्र और उसके विकास व सुरक्षा पर।' मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि उन्हें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के एक कथित सदस्य के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट मिला है, जिसमें सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेदारी लेने का जिक्र किया गया है।

अधिकारी ने बताया, 'हमने सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट देखी है और हम इसकी सत्यता की पुष्टि कर रहे हैं।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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