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सांसद बनते ही बदले तेवर: 'बिना अपॉइंटमेंट के चंद्रशेखर से न मिलें, वरना होगा एक्शन...', पार्टी ने जारी किया आदेश

Chandrashekhar Azad Ravan: आजाद समाज पार्टी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि जो भी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता माननीय सांसद जी (चंद्रशेखर रावण) से मिलने जाना चाहते हैं तो उन्हें अपने शीर्ष नेतृत्व को सूचित कर उनकी अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

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Chandrashekhar Azad Ravan

Photo : PTI

Chandrashekhar Azad Ravan: उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद चुने गए चंद्रशेखर रावण के तेवर बदल गए हैं। चंद्रशेखर रावण की पार्टी आजाद समाज पार्टी ने कहा है कि अगर कोई भी बिना अपॉइंटमेंट के सांसद चंद्रेशखर रावण से मिलने पहुंचेगा तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष की ओर से पत्र भी जारी किया गया। इसमें साफ लिखा गया है कि कोई भी अधिकारी या कार्यकर्ता को चंद्रशेखर रावण से मिलने के लिए पहले शीर्ष नेतृत्व की अनुमति लेनी होगी।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार चित्तौड़ की ओर से जारी पत्र में कार्यकर्ताओं को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया गया है। पत्र में लिखा है कि आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद नगीना लोकसभा सीट से सांसद चने गए हैं। इसक महत्वपूर्ण सफलता के लिए प्रदेश स्तर, मंडल स्तर एवं जिले स्थर के सभी सम्मानित अधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने पूरी निष्ठा के साथ तन-मन-धन से सहयोग किया। इसके लएि सभी साथियों का तहे दिल से आभार व धन्यवाद।

शीर्ष नेतृत्व से लेनी होगी अनुमति

पत्र में आगे कहा गया है कि नगीना लोकसभा की ऐतिहासिक विजय के पश्चात देशभर के प्रतिष्ठित व्यक्ति माननीय सासंद जी से मिलने लगातार पहुंच रहे हैं। अत: उत्तर प्रदेश के सभी साथियों से निवेदन है कि जो भी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता माननीय सांसद जी से मिलने जाना चाहते हैं तो उन्हें अपने शीर्ष नेतृत्व को सूचित कर उनकी अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यदि कोई भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता बिना पूर्व सूचना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से मिलने जाएंगे तो यह अनुशासहीनता की श्रेणी में माना जाएगा और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

मैं खुद आपसे आकर मिलूंगा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पत्र के बाद चंद्रशेखर रावण ने एक पोस्टर जारी कर कहा है कि दिल्ली में बड़ी तादात में मिलने आ रहे कार्यकर्ताओं की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा, तुमसे ही बना हूं और तुम में से ही एक हूं। हमारे बीच कोई दरवाजा नहीं है जो आपको मुझको रोके। मैं खुद आपसे आकर मिलूंगा, थोड़ा समय दीजिए। मैं आप सबका ही तो हूं और आप सभी मेरे अपने हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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