Ram Mandir Donation Row: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) ने पुलिस के सामने जो बयान दिया है, उसकी जानकारी अब सामने आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस के सामने चंपत राय ने कहा है कि चंदा चोरी में उनकी कोई भूमिका नहीं है। अपने ड्राइवर टिन्नू यादव को लेकर चंपत राय ने कहा है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि टिन्नू ऐसा करेगा, उसने गलत किया है।
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चंदा चोरी की जानकारी होने पर चंपत राय ने क्या किया?
चंपत राय ने कहा कि जब उन्हें चोरी की जानकारी मिली तो उन्होंने एक्शन लिया, पड़ताल किया, साथ ही पैसे भी रिकवर करवाए। चंपत राय ने कहा कि वो इस चोरी के लिए जवाबदेह तो हो सकते हैं लेकिन जिम्मेदार नहीं हैं।
टिन्नू यादव पर क्या बोले चंपत राय?
टिन्नू यादव को लेकर जब चंपत राय से पुलिस ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वो इतने बड़े लेवल पर गड़बड़ी कर सकता है, इसका अंदाजा उन्हें नहीं था। जानकारी हुई तो उसपर भी कार्रवाई हुई, उसके घर से भी पैसे बरामद हुए।
कर्मचारियों की नियुक्ति पर क्या बोले चंपत?
कर्मचारियों की नियुक्ति में सिफारिश को लेकर भी पुलिस ने चंपत राय से सवाल किए। चंपत राय ने बताया कि सिर्फ उनकी ही नहीं बल्कि ट्रस्ट के और पदाधिकारियों, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की सिफारिश पर भी कर्मचारी रखे जाते हैं। इनकी नियुक्ति में किसी की मंशा बुरी नहीं थी।
SBI ने पहले की पकड़ ली थी चोरी?
बता दें कि दावा किया जा रहा है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) तीन महीने पहले इस मंदिर में नकदी गिनने वाले कर्मचारियों को बदलना चाहता था लेकिन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने उसे ऐसा करने की अनुमति नहीं दी थी। एसबीआई के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि बैंक तीन महीने पहले राम मंदिर में नकदी गिनने वाले कर्मचारियों को बदलना चाहता था जिन्हें बैंक ने एक निजी कम्पनी के जरिये नियुक्त किया था, मगर ट्रस्ट के सदस्यों ने बैंक को उन्हें बदलने की इजाजत नहीं दी। सूत्रों ने बताया कि बैंक ने इन कर्मचारियों को 12 हजार से 15 हजार रुपये की मामूली तनख्वाह पर रखा था। उन्होंने बताया कि एसबीआई तीन महीने पहले ही चोरी का शक होने पर राम मंदिर में दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों को हटाना चाहता था और उस वक्त तक मंदिर में दिये गये चढ़ावे की चोरी का मामला सामने नहीं आया था। सूत्रों ने बताया कि बैंक को लगभग तीन महीने पहले मंदिर की दान पेटियों से धन निकाले जाने का शक हुआ था, तब उसने दान की रकम गिनती की ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश की थी।
