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'व्यापारिक जहाजों पर हमले अस्वीकार्य', AZEC बैठक में बोले विदेश मंत्री जयशंकर; होर्मुज स्ट्रेट-सप्लाई चेन पर लंबी चर्चा

पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात और होर्मुज स्टेट बंदी के कारण पिछले कुछ दिनों से बिगड़े हालात पर व्यापारिक जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। वैश्विक विकास की मांग है कि ऊर्जा बाजारों को संकुचित न किया जाए। एक प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता के रूप में, भारत आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ मिलकर काम करेगा।

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AZEC बैठक में बात करते विदेश मंत्री एस. जयशंकर (फोटो-@DrSJaishankar)

भारत ने ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधानों को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सुरक्षित और निर्बाध समुद्री परिवहन की आवश्यकता पर जोर दिया है। जापान द्वारा आयोजित ‘एजेडईसी’ बैठक में भाग लेते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता के लिए समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। भारत ने कहा कि व्यापारिक जहाजों (मर्चेंट शिपिंग) पर किसी भी प्रकार के हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं, और इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। बैठक के बाद विदेश मंत्री ने एक्स पर कहा कि एनर्जी मार्केट में सप्लाई चेन में रुकावटों पर चर्चा करने के लिए जापान की ओर से बुलाई गई ‘एजेडीईसी’ मीटिंग में हिस्सा लिया। सुरक्षित और बिना रुकावट वाले समुद्री परिवहन को लेकर भारत की प्रतिबद्धता जताई।

उन्होंने रेखांकित किया कि "इन समुद्री मार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर किसी भी तरह का हमला हम स्वीकार नहीं करते हैं। ग्लोबल ग्रोथ की मांग है कि ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। बड़े उपभोक्ता के तौर पर भारत सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने के लिए अपने साझेदारों संग काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक में कौन-कौन शामिल

बैठक के दौरान भारत ने सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयासों के जरिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। जापान सरकार की तरफ से आयोजित 'एशिया जीरो एमिशन कम्युनिटी (एजेडईसी) प्लस ऑनलाइन समिट ऑन एनर्जी रेजिलिएंस' को मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, थाईलैंड के पीएम अनुतिन चार्नविराकुल, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान समेत कई बड़े नेताओं ने भी वर्चुअली संबोधित किया।

मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, तिमोर-लेस्ते, सिंगापुर, बांग्लादेश और थाईलैंड के नेताओं के अलावा, समिट में ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, ब्रुनेई, श्रीलंका और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) जैसे संगठनों के मंत्री भी शामिल हुए।

इब्राहिम ने कहा, "मलेशिया एजेडईसी के जरिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि स्थिर, पर्याप्त और लचीली एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित हो सके। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) सहित एक ऊर्जा उत्पादक के तौर पर, मलेशिया क्षेत्रीय एनर्जी सुरक्षा को सपोर्ट करने में एक रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा, साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी सहित एनर्जी सोर्स में विविधता लाएगा और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हमारे एनर्जी सिस्टम को मजबूत करेगा।"

अपने संदेश में, फिलीपींस के राष्ट्रपति आर. मार्कोस जूनियर ने ग्लोबल ऑयल सप्लाई में आने वाले झटकों से देश के कमजोर होने की बात रखी। उन्होंने फरवरी में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने को एक बड़ी रुकावट बताया, जिससे फ्यूल की कीमतें बढ़ीं। फिलीपीन न्यूज़ एजेंसी ने मीटिंग के दौरान फिलीपींस के लीडर के हवाले से कहा, "एक आइलैंड वाले देश के तौर पर... हम ज्यादातर आयातित पेट्रोलियम पर निर्भर हैं।" उन्होंने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटें देश में "बहुत ज्यादा महसूस" हो रही हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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