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नाबालिग से दुष्कर्म का मामला: आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार, हाईकोर्ट ने कहा- तुरंत सरेंडर करें

Asaram Bapu Life Imprisonment Sentence: कोर्ट ने आसाराम समेत तीन आरोपियों की अपीलों पर फैसला सुनाते हुए गैंगरेप के आरोप से उन्हें बरी कर दिया, लेकिन बाकी आरोपों में दोषसिद्धि कायम रखी।

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नाबालिग से दुष्कर्म का मामला: आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार, हाईकोर्ट ने कहा- तुरंत सरेंडर करें

Asaram Bapu News: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। जोधपुर पीठ की डिवीजन बेंच ने आसाराम समेत तीन आरोपियों की अपीलों पर फैसला सुनाते हुए गैंगरेप के आरोप से उन्हें बरी कर दिया, लेकिन बाकी आरोपों में दोषसिद्धि कायम रखी। आसाराम सहित तीन आरोपियों की अपीलों पर हुआ फैसला आया है।

जस्टिस अरूण मोंगा व जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने मामले में सुनवाई करते हुए आदेश सुनाया। सह आरोपी शिल्पी व शरतचंद को सजा से राहत मिल गई है। जहां आसाराम को सरेंडर करना होगा।

पढ़ें- पूरा मामला विस्तार से

राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्वयंभू बाबा आसाराम को बुधवार को आंशिक राहत देते हुए उसे भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत सामूहिक दुष्कर्म और बच्चे के सामूहिक यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया, जबकि नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उसकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।

न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(डी) और यौन अपराध संरक्षण अधिनियम की धारा 5(जी)/6 के तहत आसाराम को बरी कर दिया। अदालत ने उसे आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धारा 120(बी) से भी मुक्त कर दिया। हालांकि खंडपीठ ने नाबालिग से दुष्कर्म से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) के तहत अधीनस्थ अदालत द्वारा आसाराम को सुनाई गई सजा को बरकरार रखा।

अदालत ने आसाराम को इस सजा के मद्देनजर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। वह इस समय अस्थायी जमानत पर बाहर है, जिसे सोमवार को सात दिनों के लिए और बढ़ाया गया था।

उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की अन्य कई धाराओं के तहत दोषसिद्धि को भी बरकरार रखा, जिनमें धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 370(4) (मानव तस्करी), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (महिला की मर्यादा भंग करना) और 354(ए) (यौन उत्पीड़न) शामिल हैं। इसके अलावा, पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत भी दोषसिद्धि को कायम रखा गया।

इस बीच, अदालत ने सह-आरोपी संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी और शरत चंद्र को बरी कर दिया, जिन्हें पहले मानव तस्करी और षड्यंत्र की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था।

खंडपीठ ने 20 अप्रैल को आसाराम और सह-आरोपियों की अपीलों पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

आदेश सुनाने से पहले अदालत ने कथित तौर पर टिप्पणी की कि उसके पास आरोपी के लिए ’’अच्छी और बुरी, दोनों तरह की खबरें’’ हैं और आरोपी पहले कौन-सी खबर सुनना चाहता है। आसाराम को अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के मामले में 25 अप्रैल 2018 को दोषी ठहराया गया था और भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की कई धाराओं के तहत उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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