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जेल से बाहर आकर कितना कमाल कर पाएंगे केजरीवाल? जानें चुनाव प्रचार के लिए क्या होगा खास प्लान

Arvind kejriwal: लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए अरविंद केजरीवाल को देश की सर्वोच्च अदालत से जमानत मिल गई है, अब सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या जेल से बाहर आने के बाद सीएम केजरीवाल ऐसा कमाल कर पाएंगे, जिसका असर चुनावी परिणाम में देखने को मिल सकता है। आपको AAP का प्लान समझाते हैं।

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अरविंद केजरीवाल को मिली अंतरिम जमानत।

Photo : Times Now Digital

Delhi News: जब 21 मार्च को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, तो आम आदमी पार्टी के नेताओं ने ये नारा दिया था कि 'जेल के ताले टूटेंगे, अरविंद केजरीवाल छूटेंगे...', जब आप नेता संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली तो उन्होंने भी बाहर आते ही ये दावा किया कि अब उनके बाद सीएम केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भी जल्द जमानत मिलेगी। केजरीवाल अब जेल से बाहर आने के लिए तैयार हैं, क्योंकि 50 दिनों से अधिक जेल की सलाखों में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है। चूकि केजरीवाल को 21 दिनों के लिए जमानत मिली है, ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर आम आदमी पार्टी का आगामी 21 के लिए क्या कुछ खास प्लान है।

क्या कोई खास कमाल कर पाएंगे सीएम केजरीवाल?

सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 1 जून तक जो अंतरिम जमानत दी है, उसका आधार ये है कि लोकसभा चुनाव में वो अपनी पार्टी के लिए प्रचार कर सकें। अब सवाल ये उठता है कि क्या सीएम केजरीवाल जेल से बाहर आने के बाद चुनाव में कोई खास कमाल कर पाने में कामयाब होंगे? क्या उनके चुनाव प्रचार करने के आम आदमी पार्टी मजबूती के साथ चुनावी लड़ाई लड़ पाएगी।

आम आदमी पार्टी को जीत दिलाने की बड़ी चुनौती

तीन चरणों का मतदान हो चुका है और चौथे राउंड की वोटिंग 13 मई को होनी है, उसके बाद 5वें चरण का मतदान 20 मई को होगा। 25 मई को छठा और 1 जून को 7वें राउंड की वोटिंग होनी है। छठे और सातवें राउंड की वोटिंग अहम है, क्योंकि इन्हीं दोनों फेज में हरियाणा, दिल्ली और पंजाब की सभी सीटों के लिए वोटिंग होनी है। ऐसे में केजरीवाल के सामने इन राज्यों में आम आदमी पार्टी को जीत दिलाने की बड़ी चुनौती होगी।

किस राज्य की किन सीटों पर फोकस करेंगे केजरीवाल?

अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर आने के बाद कहां-कहां चुनाव प्रचार करेंगे, उनका फोकस कि-किन राज्यों में ज्यादा होगा? ये सवाल उठना लाजमी है, क्योंकि जब वो जेल से बाहर आएंगे और चुनाव प्रचार में जान फूंकेंगे तब तक चौथे चरण के लिए प्रचार खत्म हो जाएंगे। ऐसे में आखिरी के तीन चरणों पर केजरीवाल ज्यादा जोर देने की कोशिश करेंगे। हरियाणा की सभी 10 सीटों के लिए 25 मई यानी छठे चरण में वोटिंग होगी, वहीं दिल्ली की सभी 7 सीटों के लिए भी इसी दिन मतदान होंगे। इसके अलावा पंजाब की सभी 13 सीटों पर आखिरी चरण यानी 1 जून को वोटिंग होगी, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है।

केजरीवाल को एक जून तक मिली अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए एक जून तक अंतरिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार केजरीवाल को दो जून को आत्मसमर्पण करना होगा और जेल वापस जाना होगा।

सीएम केजरीवाल की इस मांग को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराया

पीठ ने केजरीवाल के वकील अभिषेक सिंघवी के इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया कि उन्हें चार जून को होने वाली मतगणना के एक दिन बाद पांच जून तक अंतरिम जमानत दी जाए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चुनाव प्रचार के आधार पर केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए न्यायालय में कहा कि ऐसा कोई पूर्व उदाहरण नहीं है।

न्यायालय ने कहा कि केजरीवाल को 21 दिन के लिए अंतरिम जमानत देने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। शीर्ष अदालत मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखने के दिल्ली उच्च न्यायालय के पिछले महीने के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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