कोरोना से लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार "वैक्सीन" मगर वो भी 'जनता' को नहीं मयस्सर, पिस रहे आम लोग

देश
रवि वैश्य
Updated May 31, 2021 | 13:35 IST

Corona ke Teeko Ki Kami:देश में कोरोना महामारी से लड़ने में कोविड-19 वैक्सीनेशन बेहद कारगर माना जा रहा है लेकिन इनके प्रोडक्शन की कमी के चलते आम आदमी सफर कर रहा है।

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भारत में कई लोग करोना वैक्सीन की कमी से जूुझ रहे हैं 

मुख्य बातें

  • दूसरी लहर जो काफी तीव्र मानी जा रही है उसकी चपेट में आकर तमाम मौतें हो गईं
  • कारगर माने जाने के लिए कोरोना वैक्सीनेशन से एक बड़ी उम्मीद जगी
  • टीकों की किल्लत को लेकर दिल्ली, राजस्थान, साउथ के कुछ राज्यों से शिकायत सामने आने लगीं

People Face Lack Of Vaccine in India:कोरोना संकट की मार से दुनिया के तमाम मुल्क जूझ रहे हैं ऐसे में भारत भी इसकी मार से खासा बेहाल है ये संकट पिछले साल के शुरूआत से चला आ रहा है। ये कोरोना लहर मानी गई थी जिसके तमाम लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और जब इसकी दूसरी लहर चल रही है तो उसमें तो और भी ज्यादा इसकी तीव्रता है जिसके चलते कई मौतें हो गई हैं और लोग बीमारी से लड़ने के लिए अस्पताल और ऑक्सीजन, दवा आदि की कमी से जूझ रहे हैं वहीं वैक्सीनेशन की शुरूआत होने से इससे लड़ाई में मदद मिलने की उम्मीद है लेकिन वैक्सीन की कमी का सामना कई जगहों पर करना पड़ रहा है जिससे आम लोग परेशान हैं।

कोरोना की पिछली साल की लहर या पहली लहर की बात करें तो साल के शुरू से स्टार्ट होकर साल के अंत या कहें इस साल की शुरूआत में इसकी गति धीमी पड़ने लगी सरकार भी बेफिक्र होने लगी और लोग भी खासे निश्चिंत हो गए, तभी कोरोना की दूसरी लहर जिसका अनुमान लगाया जा रहा था उसकी धमक दिखाई दी।

कोरोना की इस दूसरी लहर जो काफी तीव्र मानी जा रही है उसकी चपेट में आकर तमाम मौतें हो गईं, इस दौरान दवाइयों की बेड की ऑक्सीजन की आईसीयू की भारी मारामारी मची रही और लोग इसे लेकर काफी नुकसान उठा गए कितनों ने अपने परिजनों को खो दिया और कितने परिवार उजड़ गए।

कोरोना वैक्सीनेशन से एक बड़ी उम्मीद जगी

वहीं अब इससे निपटने में कारगर माने जाने के लिए कोरोना वैक्सीनेशन से एक बड़ी उम्मीद जगी कि चलो इसे लगाकर बचाव होगा शुरूआत में बुजुर्गों, बीमार लोगों के फिर 45+ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीके लगना शुरू हुए फिर बाद मे 18 से 44 की उम्र वालों का भी टीकाकरण शुरू हो गया। शुरूआत में तो सब सही से चलता रहा दिक्कत आई 1 मई के बाद से वो भी कुछ जगहों पर ज्यादा जब 18 + वालों को टीके लगने शुरू हुए कुछ दिनों में टीकों की किल्लत को लेकर दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, साउथ के कुछ राज्यों से शिकायत सामने आने लगी की टीकों की कमी हो रही है, जिसके चलते टीकाकरण प्रभावित हो रहा है वहीं लोगों को कोविन एप पर रजिस्ट्रेशन के बाद भी स्लॉट मिलने में भी भारी दिक्कत आ रही है इससे भी टीका लगवाने वाले मायूस हैं।

राजधानी में 18+ वालों के लिए कई वैक्सीनेशन सेंटर बंद

दिल्ली में तो 18+ वालों के लिए कई वैक्सीनेशन सेंटर बंद तक करने पड़ गए क्योंकि वहां पर कोविशील्ड और कोवैक्सीन की डोज ही नहीं लगाने को मिल पा रही है, दिल्ली सरकार का कहना है कि केंद्र उन्हें डोज नहीं दे रहा है जिसके चलते दिल्ली में टीकाकरण अभियान नहीं चल पा रहा है और लोग वैक्सीन का इंतजार कर रहे हैं।

..तो क्या 1.5 लाख लोगों का पहला डोज बर्बाद हो जाएगा

दिल्ली कांग्रेस ने कहा कि केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली में सही समय पर टीका खरीदने के आदेश न दिए जाने के कारण 18-44 वर्ष के युवाओं द्वारा पहले डोज के रूप में लिए गए 1.5 लाख से अधिक को-वैक्सीन के टीके व्यर्थ होने के कगार पर है। उन्होंने टीके व्यर्थ होने की संभावित खतरे के बारे में बताते हुए कहा, 1 मई के बाद 8.17 लाख टीके 18-44 वर्ष के युवाओं को लगे हैं, इनमें से 1.5 लाख को-वेक्सीन व 6.67 लाख कोवीशील्ड है, 28-42 दिनों के बीच को-वैक्सीन के दूसरे डोज लेने होते हैं। इस हिसाब से जिन्होंने 1 मई को को-वैक्सीन के टीके लगवाए, उन्हें 29 मई से 11 जून के बीच ही दूसरा डोज लगवाने होंगे जबकि इस समय राजधानी में 18-44 आयु वर्ग के लिए टीके खत्म हैं। 

अब विदेशों से वैक्सीन खरीदने की योजना

इस बीच वैक्सीन की कमी को देखते हुए दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने अब विदेशों से वैक्सीन खरीदने की योजना बनाई है, दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने 10 मिलियन डोज़ के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है, बताया जा रहा है कि टेंडर जारी करने के लिए बिड करने की आखिरी तारीफ सात जून है जिससे इस समस्या का कुछ समाधान निकल सके।

कोरोना डोज का इंतजार करते लोग इस सिस्टम में पिस रहे हैं

यही स्थिति का सामना कई और राज्य कर रहे हैं, कहीं ज्यादा तो कहीं कम वहीं तस्वीर का दूसरा रूख ये भी है कि कई प्रदेशों में आराम से कोरोना का टीका लगाया जा रहा है, कहने का अर्थ ये है कि चाहें टीकों का उत्पादन कम हो या कोई और वजह लेकिन इस सबके बीच पहली डोज लगवाकर दूसरी डोज का वेट कर रहे लोग और तमाम पहली ही कोरोना डोज का इंतजार करते लोग इस सिस्टम में पिस रहे हैं और उन्हें कोरोना डोज का इंतजार है जो फिलहाल तो उन्हें आसानी से मिलता नहीं दिख रहा है।

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