Monkeypox case in India: केरल में मंकीपॉक्स का तीसरा मामला सामने आया, UAE से लौटे शख्स में हुई संक्रमण की पुष्टि

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 22, 2022, 03:08 PM IST

Monkeypox case in India: केरल में मंकीपॉक्स का तीसरा मामला सामने आया है। जिस संक्रमण में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है वह जुलाई माह के दौरान ही संयुक्त अरब अमीरात से वापस लौटा था।

Monkeypox case in India: केरल में मंकीपॉक्स का तीसरा मामला सामने आया, UAE से लौटे शख्स में हुई संक्रमण की पुष्टि

तिरुवनंतपुरम: केरल में मंकीपॉक्स का तीसरा मामला सामने आया है। जुलाई की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लौटे 35 वर्षीय युवक में मंकीपॉक्स के संक्रमण की पुष्टि हुई है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि मलप्पुरम का रहने वाला युवक छह जुलाई को अपने गृह राज्य लौटा था और उसका तिरुवनंतपुरम के मंजेरी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। जॉर्ज के मुताबिक, युवक की हालत स्थिर है। उन्होंने बताया कि संक्रमित के संपर्क में रहे लोगों पर करीबी नजर रखी जा रही है। 

सरकार ने जारी की एसओपी

केरल में मंकीपॉक्स के तीन मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने संक्रमित लोगों या जिनमें इसके लक्षण नजर आ रहे हैं उनके पृथक रहने, नमूने एकत्रित करने और उपचार के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने एक प्रेस विज्ञप्ति में एसओपी का विवरण दिया, जिसका पालन सभी निजी तथा सरकारी अस्पतालों को करना होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जिसने पिछले 21 दिनों में उस देश की यात्रा की है, जहां मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं। उनके शरीर पर अगर लाल धब्बे दिखें या उनमें सिरदर्द, शरीर में दर्द या बुखार जैसे अन्य लक्षण हों तो वे संदिग्ध वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।

इस तरह फैल सकता है संक्रमण

प्रेस विज्ञप्ति में मंत्री ने कहा कि निकट शारीरिक या सीधे त्वचा के त्वचा से संपर्क, संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने या उनके बिस्तर या कपड़ों को छूने से संक्रमण फैलने का खतरा है। इस श्रेणी में आने वाले सभी लोगों को रोगी का निकट संपर्क माना जाएगा। पीसीआर जांच के जरिए ही संक्रमण की पुष्टि हो सकती है। एसओपी के अनुसार, अगर निकट संपर्क में आए व्यक्ति को बुखार हो, तो उन्हें पृथक किया जाए और यदि उनके शरीर पर लाल धब्बे दिखाई देते हैं, तो उनके नमूने मंकीपॉक्स की जांच के लिए भेज जाएं। अगर रोगी के निकट संपर्क में आए किसी व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं भी है, तब भी वे रक्तदान आदि ना करें।

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