30 जनवरी से आमरण अनशन करेंगे अन्ना हजारे, बोले-अंतिम सांस तक बैठा रहूंगा, जानें इस बार क्यों कर रहे आंदोलन
- Edited by: आलोक कुमार राव
- Updated Dec 12, 2025, 08:21 AM IST
राज्य में लोकायुक्त कानून को मंजूरी मिले दो साल बीत जाने के बावजूद उसे लागू नहीं किया गया है, इसे लेकर उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने कहा है कि अगर लोकायुक्त कानून तुरंत लागू नहीं किया गया तो वे 30 जनवरी 2026 से अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन शुरू कर देंगे।
एक बार फिर आंदोलन के रास्ते पर अन्ना हजारे। तस्वीर-PTI
Anna Hazare announces indefinite fast: गांधीवादी विचारक एवं समाजसेवा अन्ना हजारे एक बार फिर आमरण अनशन करने का ऐलान किया है। अन्ना ने कहा है कि महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून अभी तक लागू नहीं हुआ है, इसे लागू कराने के लिए वह 30 जनवरी से आमरण अनशन पर बैठेंगे और उनका यह अनशन अंतिम सांस तक जारी रहेगा। अन्ना हजारे की इस घोषणा महाराष्ट्र के नागपुर में चल रहे शीतकालीन सत्र का सियासी माहौल गर्म हो गया है। अन्ना ने ऐसे वक्त पर अनशन का ऐलान किया है जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार है।
महाराष्ट्र में 2 साल पहले बना था कानून
इस बार अन्ना हजारे के अनशन पर बैठने की वजह महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लागू किए जाने में हो रही देरी है। राज्य में लोकायुक्त कानून को मंजूरी मिले दो साल बीत जाने के बावजूद उसे लागू नहीं किया गया है, इसे लेकर उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने कहा है कि अगर लोकायुक्त कानून तुरंत लागू नहीं किया गया तो वे 30 जनवरी 2026 से अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन शुरू कर देंगे।
पत्र में उन्होंने लिखा है कि हार्ट अटैक से मरने की बजाय देश और समाज के हित में प्राण त्यागना उनके लिए सौभाग्य की बात होगी। बता दें कि अन्ना हजारे लंबे समय से महाराष्ट्र में मजबूत लोकायुक्त कानून लागू करने की मांग करते आ रहे हैं।
साल 2011 में लोकपाल बिल के लिए दिल्ली में किया अनशन
गौरतलब है कि इससे पहले 2011 में अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन किया था। उस वक्त आंदोलन का ऐसा असर हुआ था कि केंद्र के साथ-साथ दिल्ली की कांग्रेस सरकार की विदाई हो गई थी। सीएम फडणवीस को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने कहा गै कि यह उनका निजी मुद्दा नहीं, बल्कि देश की जनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का सवाल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में इस कानून को लागू करने की इच्छाशक्ति नजर नहीं आ रही। इसलिए उनके पास आमरण अनशन के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
अन्ना हजारे को मिला था लोगों का समर्थन
2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के अनशन को देशव्यापी समर्थन मिला था। हर शहर और गांव में लोग अन्ना के मुरीद हो गए। माना जाता है कि समाजसेवी के अनशन की वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ लोग जागरूक हुए और 2014 के आम चुनाव में यूपीए की भारी हार हुई। दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए अन्ना के अनशन को आज भी लोग याद करते हैं।
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