देश

अनिल देशमुख को क्यों भेजा था जेल? नाना पटोले ने उद्धव ठाकरे और शरद पवार पर किया बड़ा खुलासा

Maharashtra Politics: नाना पटोले ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख की गिरफ्तारी की वजह को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार पर आरोप न लगाने के कारण देशमुख को जेल भेजा गया था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस दावे के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।

Image

नाना पटोले ने किया बड़ा दावा।

Nana Patole's Big Claim: महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने सूबे के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख का जिक्र कर चौंकाने वाला खुलासा किया है। साथ ही उन्होंने शिंदे सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ये अपने दावे में देशमुख की गिरफ्तारी की वजह बताई है। जिसका नाता शरद पवार और उद्धव ठाकरे के खिलाफ बयान न देना था। आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि आखिर पटोले ने ऐसा क्या कह दिया, जो सियासी उठापटक तेज हो गई।

अनिल देशमुख की गिरफ्तारी को लेकर बड़ा दावा

नाना पटोले ने कहा, "जब अनिल देशमुख जेल से बाहर आए तो उन्होंने साफ कहा कि उन पर दबाव था, उन्हें उद्धव ठाकरे और शरद पवार पर आरोप लगाने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, इसलिए उन्हें जेल भेजा गया। यह जेल से आने के तुरंत बाद अनिल देशमुख का बयान है।"

विपक्ष को डराना चाहते हैं देवेंद्र फडणवीस: पटोले

उन्होंने कहा कि क्या डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस चुनाव के समय में विपक्ष को डराना चाहते हैं, देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में कहा कि उनके पास ऑडियो वीडियो है। मैं कहता हूं कि अगर उनके दावों में वास्तविकता है, तो सच्चाई सबके सामने रखें और अगर अनिल देशमुख गुनहगार हैं तो उन पर कार्रवाई करें, लेकिन वे विपक्ष को डराने का काम कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि सत्ता का गलत इस्तेमाल करके भाजपा ने विपक्ष को डराने का काम किया है। अब समय आ चुका है, जब जनता इनको जवाब देगी। महाराष्ट्र में जनता के जो प्रश्न हैं, वो बाढ़, बेरोजगारी व किसानों की बर्बादी के हैं। सरकार इन मुद्दों पर बात करने की बजाय बेवजह की बातों को तूल दे रही है। जनहित के मुद्दे से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article