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एयर इंडिया प्लेन क्रैश की है ये वजह? एयरलाइंस एक्सपर्ट की अब आई 'कट ऑफ' थ्योरी

एयरलाइंस एक्सपर्ट (रिटार्यड) एहसान खालिद ने अपने बयान में कहा है कि पिछले महीने एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले, हो सकता है कि इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के कारण ईंधन स्विच ‘कट ऑफ’ स्थिति में चले गए होंगे और उड़ान के दोनों पायलट को इसका पता भी न चला

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12 जून को अहमदाबाद प्लेन क्रैश में 260 लोगों की हुई थी मौत- (PHOTO- PTI)

नई दिल्ली: विमानन विशेषज्ञ कैप्टन (सेवानिवृत्त) एहसान खालिद ने बुधवार को कहा कि पिछले महीने एयर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले, हो सकता है कि इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के कारण ईंधन स्विच ‘कट ऑफ’ स्थिति में चले गए होंगे और उड़ान के दोनों पायलट को इसका पता भी न चला हो।

शनिवार को, वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (एएआईबी) ने एअर इंडिया के बोइंग 787-8 दुर्घटना मामले में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा था कि विमान के इंजन के ईंधन स्विच उड़ान भरने के तुरंत बाद 1 सेकंड के अंतराल में बंद हो गए थे और इससे कॉकपिट में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी, जिसके बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बारह जून को हुए इस हादसे में 260 लोग मारे गए थे।

प्रारंभिक रिपोर्ट में हालांकि कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया

प्रारंभिक रिपोर्ट में हालांकि कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है, लेकिन कुछ हलकों में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि संभवतः पायलट की गलती दुर्घटना का कारण रही होगी। वायुसेना के पूर्व अधिकारी खालिद ने पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में यह भी कहा कि एएआईबी द्वारा कॉकपिट की पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की जा सकती थी और यदि उसे जारी किया जाता तो ‘ये अटकलें या आरोप नहीं लगाये जाते या बदनाम करने का अभियान नहीं चलता, क्योंकि पायलट समुदाय यह महसूस करता है कि उड़ान सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है।’

"एएआईबी की रिपोर्ट ने और भी अटकलों को जन्म दिया'

उन्होंने यह भी कहा कि एएआईबी की रिपोर्ट ने और भी अटकलों को जन्म दिया है, जो पहले नहीं लगाई जा रही थीं। कॉकपिट में हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए, 15 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक पायलट ने पूछा कि स्विच क्यों बंद कर दिया गया, और दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया।एआई 171 उड़ान अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी।

ईंधन स्विच बंद होने की थ्योरी

खालिद के अनुसार, हो सकता है उड़ान भरने के तुरंत बाद इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के परिणामस्वरूप विमान के ईंधन स्विच बंद हुए हों।उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि यह भी सच है कि स्विच एक स्थिति में होगा और वह स्थिति 1 हो सकती है और दूसरी स्थिति इलेक्ट्रिकल दृष्टि से 0 है... (तब) 0 से 1 या 1 से 0 (स्थिति) इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी या सिग्नल की खराबी के कारण परिवर्तित हो सकती है, जबकि स्विच उसी बिंदु पर रहा होगा।’ उन्होंने कहा, ‘...मुझे लगता है कि एएआईबी ने अपने फैसले में बहुत सावधानी बरती और ईंधन स्विच के आगे-पीछे बढ़ने जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। वे इसका इस्तेमाल कर सकते थे। ऐसा नहीं है कि उन्हें इसके बारे में पता नहीं है।’विभिन्न पायलट संघों ने एएआईबी रिपोर्ट पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से अटकलें लगाने से बचने का आग्रह किया है। (भाषा इनपुट )

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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