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अहमदाबाद में ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरी, फाइनल मैच से पहले कार पार्किंग के लिए की गई विशेष व्यवस्था

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 19, 2023, 12:35 PM IST

Ahmedabad Traffic Advisory: एसीपी नरेंद्र चौधरी ने बताया कि पूरे शहर का ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहे, इसके लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं और 1600 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि स्टेडियम आने वाले लोगों के लिए 17 पार्किंग प्लॉट तैयार किए गए हैं।

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नरेंद्र मोदी स्टेडियम के बाहर फैंस की भीड़

Photo : ANI

Ahmedabad Traffic Advisory: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट विश्वकप का फाइनल मुकाबला कुछ ही देर में शुरू होगा। इस मुकाबले को देखने के लिए फैंस स्टेडियम में इकट्ठा होना शुरू हो गए हैं। स्टेडियम के बाहर भी सैकड़ों की संख्या में फैंस टीम इंडिया को चीयर करने के लिए मौजूद हैं और भारत माता की जय व इंडिया-इंडिया के नारे लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वीवीआईपी भी इस खिताबी मुकाबले के लिए स्टेडियम में मौजूद रहेंगे।

ऐसे में पूरे क्रिकेट स्टेडियम को छावनी में तब्दील कर दिया गया और यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वहीं ट्रैफिक पुलिस ने भी भारी भीड़ को देखते हुए एडवाजरी जारी की है। इसके तहत मानसी सर्कल से केशवबाग टी जंक्शन तक ट्रैफिक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सिटी पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, यह प्रतिबंध आईटीसी नर्मदा होटल से टीम के होटल छोड़ने से आधे घंटे पहले प्रभावी होगा और उनकी वापसी के समय भी लगेगा। इसके अलावा पुलिस ने यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेने की सलाह दी है।

पार्किंग के लिए की गई विशेष व्यवस्था

अहमदाबाद पुलिस ने शहर में ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए आम और खास लोगों के लिए पार्किंग के विशेष इंतजाम किए हैं। एसीपी नरेंद्र चौधरी ने बताया कि पूरे शहर का ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहे, इसके लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं और 1600 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि स्टेडियम आने वाले लोगों के लिए 17 पार्किंग प्लॉट तैयार किए गए हैं। वहीं वीवीआईपी और वीआईपी काफिले के लिए अलग से 6 पार्किंग बनाई गई हैं। वहीं स्टेडियम जाने वाले मार्ग पर सिग्नल बोर्ड लगाए गए हैं, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति न रहे।

सुरक्षा के लिए 6 हजार पुलिसकर्मी तैनात

अहमदाबाद पुलिस ने आज के मुकाबले के दौरान सुरक्षा व्यववस्था का मजबूत रखने के लिए 6 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए हैं। इसके अलावा आरएएफ की दो कंपनी स्टेडियम के अंदर व बाहर तैनात रहेंगी। बम डिटेक्शन और डस्पोजल दस्ते की 10 टीमों के साथ चेतक कमांडो की भी दो टीमें स्टेडियम के पास तैनात की जाएंगी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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