Survey On Bihar Liquor Prohibition : बिहार में जातिगत जनगणना के बाद अब शराब पर सर्वे होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराब पर लगे प्रतिबंध का असर जानने के लिए सर्वे कराने का फैसला किया है। बता दें कि बिहार में करीब सात साल पहले 2016 से शराब के उत्पादन, वितरण एवं उसके सेवन पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। बावजूद इसके राज्य में जहरीली शराब पीने से सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि शराब पर प्रतिबंध लगाने से समाज पर पड़े इसके प्रभाव को सामने लाया जाए।
नीतीश ने बताया-शराब से क्यों नफरत हो गई?
कुमार ने नशामुक्ति दिवस के अवसर पर आयोजित एक सरकारी समारोह में सर्वे कराए जाने के बारे में संकेत दिया। बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद आसीन रहने वाले कुमार (70) ने अपने शुरुआती अनुभवों को याद किया जिसके कारण उन्हें शराब से नफरत हो गई थी। उन्होंने कहा, ‘जिस स्थान पर मैंने अपना बचपन बिताया था, वह इस बुराई से मुक्त था। जब मैं इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के लिए पटना आया और किराए के जिस मकान में मैं रहता था, वहां पड़ोस में कुछ लोग शराब पीते थे और उपद्रव करते थे।’
राजनीतिक गुरु कर्पूरी ठाकुर को याद किया
उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु कर्पूरी ठाकुर के शासन में राज्य में शराबबंदी की अल्पकालिक कोशिश का जिक्र करते हुए कहा, ‘लेकिन सरकार दो साल से अधिक नहीं चली और उसके बाद के शासन द्वारा शराब पर प्रतिबंध हटा दिया गया। कई बडे लोगों के कड़े विरोध के बावजूद, हमने अप्रैल, 2016 में कदम उठाया। 2018 में किए गए एक सर्वेक्षण में इसका सकारात्मक परिणाम दिखा।’ कर्पूरी ठाकुर 1970 के दशक में जनता पार्टी के नेता के रूप में मुख्यमंत्री बने थे।
एक करोड़ 64 लाख लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया
कुमार ने कहा, ‘2018 में सर्वे कराया गया तो पता चला कि एक करोड़ 64 लाख लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया है। वर्ष 2023 के सर्वे से पता चला कि एक करोड़ 82 लाख लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया है। सर्वे से यह भी पता चला कि 99 प्रतिशत महिलायें जबकि 92 प्रतिशत पुरुष शराबबंदी के पक्ष में हैं। शराबबंदी को लेकर प्रतिदिन हमारे पास रिपोर्ट आती है। शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने के आरोप में बहुत लोग पकड़े गये हैं।’ उन्होंने अधिकारियों से कहा, ‘आपलोग ठीक ढंग से एक बार फिर से शराबबंदी का सर्वे कीजिए। हम तो कहेंगे एक-एक घर में जाकर पता कीजिए कि शराबबंदी का क्या प्रभाव है।’
'शराबबंदी को लेकर ठीक ढंग से आंकलन कीजिए'
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमलोगों ने जाति आधारित गणना कराई जिसमें एक-एक घर जाकर सभी चीजों की जानकारी ली गयी। उसी प्रकार एक-एक घर जाकर शराबबंदी को लेकर ठीक ढंग से आंकलन कीजिए। सर्वे से ये पता चल जाएगा कि कौन-कौन लोग इसके पक्ष में हैं और कौन-कौन इसके खिलाफ । इससे पता चलेगा कि कितने लोग इसके पक्ष में हैं।’उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में शराबबंदी लागू है लेकिन वहां इस पर अच्छे से काम नहीं होता है।
शराब पीने की वजह से सड़क दुर्घटनाएं
कुमार ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी शराब पीने से होनेवाले दुष्परिणामों को लेकर सर्वे किया था और उसका रिपोर्ट जारी किया था। उनका कहना था कि शराब पीने से कई प्रकार की बीमारियां होती हैं और 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटना शराब पीने के कारण होती है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
