कॉकरोच जनता के पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने हाल ही में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और निजी स्कूलों की बढ़ती फीस के मुद्दे को लेकर दीपके ने शनिवार को अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की है।
इसी बीच उन्होंने यह बताया कि उनके जीवन पर फिल्म 'स्वदेश' का बड़ा असर पड़ा है। दिपके ने बताया है कि फिल्म में शाहरुख खान के किरदार मोहन को देखकर उनके मन में भी अपने गांव के लिए कुछ करने की इच्छा पैदा हुई थी। उन्होंने दावा किया कि ‘स्वदेस’ को वह अब तक 100 से ज्यादा बार देख चुके हैं।
‘स्वदेस’ की कहानी ने दिपके पर छोड़ी गहरी छाप
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में बताया कि वह बचपन से ‘स्वदेस’ देखते आए हैं और फिल्म से उनका गहरा जुड़ाव है। उनके मुताबिक, फिल्म का एक खास दृश्य उन्हें बार-बार भावुक करता है। फिल्म में शाहरुख खान का किरदार मोहन भार्गव अपने गांव चरणपुर लौटता है। इसी दौरान वह हरिदास नाम के व्यक्ति की मुश्किलों को करीब से देखता है। हरिदास अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने में भी संघर्ष कर रहा होता है। इसके बाद लौटते समय मोहन ट्रेन में एक बच्चे को स्कूल जाने के बजाय स्टेशन पर पानी बेचते देखता है। यह दृश्य दिपके के मन में बस गया।
दिपके ने कहा कि जिस तरह उस दृश्य में मोहन की आंखों में आंसू आते हैं, उसी तरह वह भी हर बार भावुक हो जाते हैं। उनके मुताबिक, इसी के बाद उनके मन में यह इच्छा पैदा हुई कि एक दिन वह भी अपने गांव के लिए कुछ ऐसा करें, जैसा फिल्म में मोहन ने चरणपुर के लिए किया था।
‘100 से ज्यादा बार देखी है फिल्म’
दिपके ने ‘स्वदेस’ को लेकर अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने इस फिल्म को 100 से ज्यादा बार देखा है। उन्होंने फिल्म के एक संवाद का भी जिक्र किया और कहा कि ‘स्वदेस’ उनके भीतर तक उतर गई। उनके मुताबिक, फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं थी, बल्कि इसने उन्हें अपने समाज और गांव के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि उनके दिल में लंबे समय से यह इच्छा थी कि वह अपने गांव के लिए कुछ कर सकें।
सीजेपी ने तैयार किया चेकलिस्ट: दीपके
सरकारी स्कूलों की बदहाली पर चिंता जताते हुए दीपके ने कहा कि आजादी के 80 वर्ष बाद भी यदि सरकारी स्कूलों में पानी जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है तो देश के विकास की बात कैसे की जा सकती है। उन्होंने स्कूल की खस्ताहाल स्थिति का आरोप लगाते हुए कहा कि कई खिड़कियां टूटी हुई हैं और विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले बेंच भी पर्याप्त नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सीजेपी ने एक चेकलिस्ट तैयार की है, जिसके माध्यम से सरकारी स्कूलों में पानी, शौचालय, बेंच, खिड़की और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आंकड़ा जुटाया जाएगा। पहले महाराष्ट्र और बाद में देशभर के सरकारी स्कूलों से जानकारी एकत्र कर उसका संकलन किया जाएगा।
