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अरविंद केजरीवाल को घर दिलाने के लिए हाईकोर्ट पहुंची AAP, जानें क्या है सारा माजरा

Kejriwal House Controversy: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घर दिलाने के लिए अब आम आदमी पार्टी (आप) ने हाईकोर्ट का रुख किया है। आप ने केजरीवाल को दिल्ली में आवास आवंटन के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। आपको बताते हैं कि आखिर सारा माजरा क्या है।

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अरविंद केजरीवाल।

Photo : BCCL

Delhi Politics: आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि केंद्र सरकार को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को राजधानी में एक आवास आवंटित करने का निर्देश दिया जाए। आप की ओर से अदालत में पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील ने कहा कि इस संबंध में जारी दिशानिर्देश के अनुसार किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के अध्यक्ष को दिल्ली में आवास का अधिकार है और इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल को आवास आवंटित किया जाना चाहिए।

26 नवंबर को मामले पर सुनवाई करेगी अदालत

न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने याचिका पर केंद्र का रुख पूछा और इसे 26 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। आप के वकील ने कहा कि केजरीवाल को आवास के आवंटन के लिए 20 सितंबर को संबंधित अधिकारियों को एक पत्र भेजा गया था और उन्हें एक और पत्र भेजकर इस बारे में याद भी दिलाया गया।

उन्होंने कहा, 'सभी पूर्व शर्तों को पूरा किया जा रहा है। एक राष्ट्रीय संयोजक हैं जो राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हम चाहते हैं कि यह आवास दिल्ली के केंद्र में स्थित हो।'

सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद खाली किया था बंगला

राजनीतिक दलों को सामान्य पूल से आवास आवंटन के लिए दिशानिर्देशों के अनुसार, मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को लाइसेंस शुल्क का भुगतान करके अपने कार्यालय उपयोग के लिए दिल्ली में सामान्य पूल से एक आवासीय इकाई का आवंटन कराने की अनुमति है। इस प्रावधान के अनुरूप उच्च न्यायालय ने पांच जून को व्यवस्था दी थी कि आप को यहां अन्य राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की तरह पार्टी कार्यालय के लिए स्थान पाने का अधिकार है। अदालत ने भारतीय जनता पार्टी नीत केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर निर्णय करने को कहा।

इसके बाद आप को लुटियन्स दिल्ली में पंडित रविशंकर शुक्ला लेन में एक नया कार्यालय आवंटित किया गया। दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि मामले मे किसी मान्यताप्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल के अध्यक्ष को आवास आवंटन किया जाएगा, यदि उनके पास दिल्ली में अपना कोई आवास नहीं है या सरकार ने अन्य किसी नाते उन्हें आवंटित नहीं किया है। केजरीवाल ने चार अक्टूबर को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद 6, फ्लैगस्टाफ रोड स्थित बंगला खाली कर दिया था और मंडी हाउस के पास एक पार्टी सांसद के आधिकारिक आवास में आकर रहने लगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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