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भारतीय सेना का दुनिया भर में बजा डंका, 821 जवानों को मिला संयुक्त राष्ट्र पदक

मेडल डे परेड की परंपरा संयुक्त राष्ट्र द्वारा उन शांति सैनिकों को मान्यता देने के लिए शुरू की गई थी, जिन्होंने किसी यूएन मिशन क्षेत्र में लगातार कम से कम 90 दिन सेवा की हो।

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भारतीय सेना के 821 जवान संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित (फोटो- @Rural2Rocket)

भारतीय सेना अपनी जंग जीतने की काबिलियत के लिए तो जानी ही जाती है, लेकिन जब दुनिया में शांति स्थापित करने की बात आती है, तब वहां भी भारतीय सेना सबसे आगे खड़ी रहती है। यही कारण है कि भारतीय सेना के 821 जवानों को संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें लेबनान में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए दिया गया।

मेडल डे परेड का हुआ आयोजन

भारतीय सेना के जवानों की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का जश्न मनाते हुए लेबनान में मेडल डे परेड का आयोजन किया गया। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के तहत तैनात भारतीय बटालियन के लिए यह औपचारिक समारोह भारतीय शांति सैनिकों की सेवा और समर्पण को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया गया था।

शांति स्थापित करने में भारत की भूमिका अहम

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारत सबसे बड़े सैनिक योगदानकर्ता देशों में से एक है। लेबनान में भारतीय सेना की उपलब्धियों के लिए आयोजित परेड का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल विकास श्योराण ने किया। उन्होंने सैन्य गरिमा और अनुशासन के साथ इस समारोह का संचालन कर भारतीय सेना के नेतृत्व की उच्च परंपराओं को दर्शाया। इस भव्य आयोजन में कई विशिष्ट अतिथियों ने शिरकत की। इनमें लेबनान में भारत के राजदूत मोहम्मद नूर रहमान शेख, यूएनआईएफआईएल सेक्टर ईस्ट के कमांडर, और अनेक नागरिक तथा सैन्य प्रतिनिधि शामिल थे। साथ ही, आस-पास के गांवों के मेयर, लेबनानी सशस्त्र बल, स्टेट सिक्योरिटी, जनरल सिक्योरिटी, और स्थानीय समुदाय के प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

किसे मिलता है ये मेडल

सेना के मुताबिक, मेडल डे परेड की परंपरा संयुक्त राष्ट्र द्वारा उन शांति सैनिकों को मान्यता देने के लिए शुरू की गई थी, जिन्होंने किसी यूएन मिशन क्षेत्र में लगातार कम से कम 90 दिन सेवा की हो। समय के साथ यह परेड वैश्विक शांति रक्षक समुदाय के बीच पेशेवर प्रतिबद्धता और साझे मूल्यों का प्रतीक बन चुकी है। यूएनआईएफआईएल में इसे गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाता है, जो सहयोगी देशों और मेजबान राष्ट्र के बीच एकता और तालमेल को दर्शाता है। सेना ने बताया कि आयोजन में स्थानीय नागरिक प्रतिनिधियों की मजबूत उपस्थिति दर्ज की गई। यह भारतीय बटालियन और लेबनानी समुदायों के बीच गहरे सहयोग, आपसी सम्मान और स्थायी संबंधों को दर्शाती है।

सेना के जवानों ने निकाली सैन्य परेड

सेना के मुताबिक, यह वैश्विक शांति और कूटनीति के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। समारोह की विशेष झलकियों में एक उत्कृष्ट सैन्य परेड शामिल रही, जिसमें अनुशासन, तालमेल और प्रशिक्षण की ऊंचाई को दर्शाते हुए भारतीय सेना की विश्वव्यापी प्रतिष्ठा को और बल मिला। यह परेड भारतीय सैन्य संस्कृति और निष्ठा का जीवंत प्रतीक रही। सेना का मानना है कि मेडल डे परेड केवल सम्मान का एक मंच ही नहीं था, बल्कि यह लेबनानी नागरिक प्रशासन, सुरक्षा विभागों और यूएनआईएफआईएल अधिकारियों के बीच संवाद और सहयोग को और मजबूत करने का भी अवसर बना। यूएनआईएफआईएल में भारत की भूमिका पेशेवर उत्कृष्टता, मानवीय संवेदनशीलता और नागरिक-सैन्य सहयोग के उच्च मानक स्थापित करती आ रही है।

IANS की रिपोर्ट

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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