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786 पाकिस्तानी अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत छोड़कर चले गए अपने मुल्क; पहलगाम आतंकी हमले के बाद आया बड़ा अपडेट

India vs Pakistan: पहलगाम आतंकी हमले के बाद अटारी-वाघा सीमा के रास्ते 786 पाकिस्तानी भारत छोड़कर चले गए। जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी नागरिकों के ठहरने पर प्रतिबंध लगाया गया था, जहां 26 पर्यटक मारे गए थे। इस रिपोर्ट में आपको इससे जुड़ी हर जानकारी दे देते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

Photo : ANI

786 Pakistanis leave India: अब हिंदुस्तान में पाकिस्तानियों के लिए जगह नहीं है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार इसे लेकर सख्त कदम उठा रही है। इसी बीच एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 24 अप्रैल से शुरू हुए छह दिनों के भीतर 786 पाकिस्तानी नागरिक अटारी-वाघा सीमा बिंदु के माध्यम से भारत छोड़कर चले गए हैं।

अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अब तक कितने भारतीय स्वदेश लौटे?

अधिकारी ने बताया कि इसी दौरान अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से कुल 1376 भारतीय पाकिस्तान से लौटे हैं। 24 अप्रैल को सरकार ने घोषणा की थी कि पाकिस्तानी नागरिकों को 27 अप्रैल तक भारत छोड़ देना चाहिए, और जिनके पास मेडिकल वीजा है, उन्हें ऐसा करने के लिए 29 अप्रैल तक का समय दिया गया है। राजनयिक, आधिकारिक और दीर्घकालिक वीजा रखने वालों को 'भारत छोड़ो' नोटिस से बाहर रखा गया था। अल्पकालिक वीजा की 12 श्रेणियों में से किसी भी श्रेणी के पाकिस्तानियों के लिए समय सीमा रविवार को समाप्त हो गई।

India Pak Border

अटारी-वाघा बॉर्डर।

भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से बचने की सख्त सलाह

जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी नागरिकों के ठहरने पर प्रतिबंध लगाया गया था, जहां 26 पर्यटक मारे गए थे। सरकार ने भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा से बचने की सख्त सलाह दी है। वर्तमान में पाकिस्तान में मौजूद भारतीय नागरिकों को भी जल्द से जल्द भारत लौटने की सलाह दी गई है।

पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान कर रही हैं तमाम केंद्रीय एजेंसियां

अधिकारी ने कहा, 'कई लोग दुबई या अन्य मार्गों से उड़ान भरकर चले गए हैं, क्योंकि पाकिस्तान के लिए कोई सीधी उड़ान नहीं है। हमें उम्मीद है कि और अधिक पाकिस्तानी नागरिक देश छोड़कर जाएंगे, क्योंकि राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियाँ देश के विभिन्न स्थानों पर रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान कर रही हैं।'

Pahalgam Terrorists Attack

पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक्शन मोड में भारत।

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर सभी राज्यों में एक बड़ा सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। स्थिति पर कड़ी नज़र रखने वाले एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अगर वे 29 अप्रैल के बाद भी भारत में रुके रहे तो उनके प्रवास को अवैध माना जाएगा।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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