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रोहतांग दर्रा के ऊपर मिले 4 और शवों के अवशेष, 56 साल पहले लापता हो गया था वायु सेना का AN-12 विमान

Plane Crash Over Rohtang Pass : सात फरवरी 1968 को दो इंजन वाला परिवहन विमान 102 लोगों को लेकर चंडीगढ़ से लेह जा रहा था। इसी दौरान वह लापता हो गया। तब से इस विमान में सवार लोगों को ढूंढने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। शवों की पहचान आधिकारिक दस्तावेजों से हुई है।

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रोहतांग दर्रा में मिले और 4 शव। -फाइल फोटो

KEY HIGHLIGHTS
  • रोहतांग दर्रे के ऊपर सात फरवरी 1968 को लापता हो गया दो इंजन वाला विमान
  • वायु सेना का परिवहन विमान 102 लोगों को लेकर चंडीगढ़ से लेह जा रहा था
  • तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू, भारतीय सेना के डोगरा स्काउट की संयुक्त टीम को ये शव मिले

Plane Crash Over Rohtang Pass : हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रा में 56 साल पहले भारतीय वायु सेना का AN-12 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इस हादसे में शिकार चार और लोगों के शव अब जाकर मिले हैं। सात फरवरी 1968 को दो इंजन वाला परिवहन विमान 102 लोगों को लेकर चंडीगढ़ से लेह जा रहा था। इसी दौरान वह लापता हो गया। तब से इस विमान में सवार लोगों को ढूंढने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। सेना के अधिकारियों का कहना है कि तलाशी अभियान चला रहे तिरंगा माउंटेन रेस्क्यू, भारतीय सेना के डोगरा स्काउट की संयुक्त टीम को ये शव मिले।

बर्फीले क्षेत्र में दबे पड़े रहे शवों के अवशेष

एक अधिकारी ने कहा, ‘एक असाधारण घटनाक्रम में, 1968 में रोहतांग दर्रा पर दुर्घटनाग्रस्त हुए एएन-12 विमान से कर्मियों के अवशेष बरामद करने के लिए जारी तलाश अभियान एवं बचाव मिशन को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।’ दशकों तक विमान का मलबा और शवों के अवशेष बर्फीले क्षेत्र में दबे पड़े रहे। वर्ष 2003 में, अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान के पर्वतारोहियों ने विमान का मलबा ढूंढ लिया। इसके बाद, इन वर्षों में सेना और खासतौर पर डोगरा स्काउट्स ने कई बार खोज अभियान चलाया। डोगरा स्काउट्स 2005, 2006, 2013 और 2019 में तलाश अभियानों में अग्रिम मोर्चे पर रहा।

2019 तक केवल पांच शव मिले

अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटनास्थल के दुर्गम क्षेत्र होने और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण 2019 तक, केवल पांच शवों के अवशेष ही बरामद किये जा सके।‘चंद्र भागा माउंटेन एक्सपेडीशन’ ने अब चार और शव बरामद किये हैं, जिसके कारण मृतकों के परिजनों और राष्ट्र को एक नयी उम्मीद मिली है। अधिकारियों ने बताया कि चार में से तीन शवों के अवशेष मलखान सिंह, सिपाही नारायण सिंह और शिल्पकार थॉमस चरण के हैं। शेष अवशेष से बरामद दस्तावेजों से व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि उसके निकटतम रिश्तेदारों का विवरण मिल गया है।

पहचान आधिकारिक दस्तावेजों से हुई

थॉमस, केरल के पथनमथिट्टा जिले के एलंथूर का रहने वाला था। उन्होंने बताया कि उसके निकटतम रिश्तेदार, उसकी मां एलीमा को इस बारे में सूचना दे दी गई है। आधिकारिक रिकॉर्ड से प्राप्त दस्तावेजों की मदद से मलखान सिंह की पहचान की पुष्टि की गई। आर्मी मेडिकल कोर में सेवा देने वाले सिपाही सिंह की पहचान आधिकारिक दस्तावेजों के जरिये हुई। अधिकारियों ने बताया कि सिंह उत्तराखंड के गढ़वाल में चमोली तहसील के कोलपाड़ी गांव का रहने वाला था।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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