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'मोदी जी यह चक्रव्यूह भी टूटेगा...' सोनम वांगचुक समेत 120 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया तो भड़के राहुल गांधी

Social Activist Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक लद्दाख के करीब 120 कार्यकर्ताओं के साथ 700 किलोमीटर लंबी दिल्ली चलो पदयात्रा कर रहे हैं। वह हरियाणा के रास्ते जैसे ही दिल्ली में दाखिल हुए, पुलिस ने उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया। इस पर राहुल गांधी ने मोदी सरकार की आलोचना की है।

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पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।

Photo : Twitter

Social Activist Sonam Wangchuk: लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक मार्च करने वाले जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उनके साथ 120 लोगों को सिंघू बॉर्डर पर डिटेन किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वांगचुक समेत हिरासत में लिए गए लोगों को अलीपुर और शहर की सीमा से लगे अन्य पुलिस थानों में ले जाया गया है।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि वांगचुक और अन्य लोग सीमा पर रात बिताना चाहते थे। दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू होने के कारण उन्हें पहले वापस जाने के लिए कहा गया, लेकिन जब वे नहीं रुके तो सीमा पर पहले से तैनात पुलिसकर्मियों ने वांगचुक समेत करीब 120 लोगों को हिरासत में ले लिया। बता दें, सोनम वांगचुक लद्दाख के करीब 120 कार्यकर्ताओं के साथ 700 किलोमीटर लंबी दिल्ली चलो पदयात्रा कर रहे हैं। वह हरियाणा के रास्ते जैसे ही दिल्ली में दाखिल हुए, पुलिस ने उन्हें रोक लिया और हिरासत में ले लिया।

मोदी सरकार पर भड़के राहुल गांधी

सोनम वांगचुक को हिरातस में लिए जाने के बाद लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने मोदी सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि उन्हें लद्दाख के लोगों की आवाज सुननी होगी और यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सोनम वांगचुक जी और सैकड़ों लद्दाखियों को हिरासत में लेना अस्वीकार्य है। लद्दाख के भविष्य के लिए खड़े होने वाले बुजुर्गों को दिल्ली की सीमा पर क्यों हिरासत में लिया जा रहा है? राहुल गांधी ने आगे कहा, मोदी जी, किसानों की तरह यह चक्रव्यूह भी टूटेगा और आपका अहंकार भी टूटेगा। आपको लद्दाख की आवाज सुननी होगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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