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पुरुषों से ज्यादा क्यों जकड़ता है महिलाओं को ऑस्टियोआर्थराइटिस, वजह जान आपको भी लगेगा झटका

Why Are Women More Prone To Osteoarthritis: आपने अक्सर देखा होगा कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को हड्डियों व जोड़ों में दर्द की समस्या अधिक परेशान करती है। इसकी एक बड़ी वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस जो पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को प्रभावित करता है। लेकिन ऐसा क्यों है? आज के इस लेख में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे।

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Why Are Women More Prone To Osteoarthritis

Why Are Women More Prone To Osteoarthritis: ऑस्टियोआर्थराइटिस यानी जोड़ों का धीरे-धीरे खराब होना, आजकल महिलाओं में बहुत आम हो गया है। यह सिर्फ उम्र बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि हार्मोनल बदलाव, हड्डियों की संरचना और जीवनशैली के कारण भी होता है। खासकर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में यह समस्या तेज़ी से बढ़ जाती है। महिलाएं अक्सर सोचती हैं कि यह केवल पुरुषों के मुकाबले सामान्य है, लेकिन सच्चाई यह है कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा जोड़ों की परेशानी होती है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि क्यों और कैसे यह होता है, तो यह लेख आपके लिए है। इसमें हम कारण, लक्षण और बचाव के आसान तरीके समझाएंगे।

हार्मोन का असर

महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर गिरता है। यह हार्मोन जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। इसके कम होने से हड्डियां कमजोर होती हैं और जोड़ों पर दबाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में ऑस्टियोआर्थराइटिस का ज्यादा शिकार होती हैं।

मांसपेशियों और जोड़ों की संरचना

महिलाओं में मांसपेशियों की मात्रा पुरुषों से कम होती है और जोड़ों की लचक ज्यादा होती है। इससे हड्डियों और कार्टिलेज पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जो जोड़ों को कमजोर और दर्दनाक बना देता है।

हिप्स और घुटनों का जाल

महिलाओं के कूल्हे (hips) पुरुषों की तुलना में चौड़े होते हैं। यह घुटनों और अन्य वजन उठाने वाले जोड़ों की स्थिति को प्रभावित करता है। इसके कारण महिलाओं में घुटनों और कूल्हों में ज्यादा तनाव और सूजन होती है।

जीवनशैली और वजन का योगदान

मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ना और शारीरिक गतिविधियों में कमी, जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। मोटापा, विशेषकर कमर और घुटनों में, जोड़ों की जल्दी बिगड़ने की प्रक्रिया को तेज कर देता है।

बचाव और जीवनशैली बदलाव

संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही रूटीन का पालन, ऑस्टियोआर्थराइटिस से बचाव में मदद करता है। तैराकी, योग, साइकिलिंग और हल्की वॉक जैसी गतिविधियां जोड़ों को लचीला बनाए रखती हैं। हड्डियों और जोड़ों के लिए कैल्शियम, विटामिन D और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार लेना भी जरूरी है।

इलाज और राहत

ऑस्टियोआर्थराइटिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दर्द और सूजन को कम करने के कई उपाय हैं। फिजियोथेरेपी, स्ट्रेचिंग, हीट या कोल्ड पैक, दवाएं और गंभीर मामलों में कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स या हयालूरोनिक एसिड इंजेक्शन मदद कर सकते हैं। गंभीर स्थिति में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

निष्कर्ष

महिलाओं में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा पुरुषों की तुलना में ज्यादा है, लेकिन सही जीवनशैली और समय पर इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। वजन को संतुलित रखें, नियमित व्यायाम करें और आहार का ध्यान रखें, ताकि जोड़ों की सेहत बनी रहे और दर्द से राहत मिले।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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