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मर्दों को 50 के बाद, मगर महिलाओं को कम उम्र में भी घेर सकती है ये गंभीर परेशानी, 20-40 की महिलाएं रहें सतर्क

Myasthenia Gravis Disease Risk In Women: आमतौर पर यह देखा जाता है कि पुरुष और महिलाओं में सभी तरह की बीमारियों का खतरा लगभग समान होता है। लेकिन कुछ रेयर बीमारियां ऐसी होती हैं जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर ज्यादा जल्दी अटैक करती हैं। आपको बता दें कि एक ऐसी गंभीर बीमारी भी है जो पुरुषों को 50 के बाद, मगर महिलाओं को जवानी में ही चपेट में ले सकती है। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं....

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Myasthenia Gravis Disease Risk In Women

Myasthenia Gravis Disease Risk In Women: मांसपेशियों में बार-बार कमजोरी आना, पलकें झुकना, बोलने या निगलने में दिक्कत होना ये सब सामान्य थकान नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। इसका नाम है मायस्थेनिया ग्रेविस। यह ए ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की नसों व मांसपेशियों के बीच का तालमेल बिगाड़ देती है। इस बीमारी की अजीब बात यह है कि पुरुषों में यह ज्यादातर बढ़ती उम्र के साथ जैसे 50-70 साल की उम्र में देखने को मिलती है, लेकिन जब बात महिलाओं की आती है तो यह उन्हें 20-40 साल की कम उम्र में अपनी चपेट में ले लेती है। यही वजह है कि युवा महिलाएं भी इसके शुरुआती संकेतों को हल्के में ले लेती हैं। लेकिन ऐसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। चलिए इस गंभीर बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं....

महिलाओं में कम उम्र का खतरा

मायस्थेनिया ग्रेविस में उम्र का असर लिंग के हिसाब से अलग दिखता है। पुरुषों में यह आमतौर पर 50 साल के बाद देखने को मिलती है, जबकि महिलाओं में यह युवा उम्र, यानी 20 से 40 साल के बीच भी सामने आ सकती है।

आंख और चेहरे से शुरू होते हैं लक्षण

शुरुआत में इस बीमारी का असर अक्सर आंखों पर होता है। पलकें झुकना, धुंधला या डबल दिखना शुरुआती संकेत हो सकते हैं। समय के साथ चेहरा, गला और हाथ-पैर की मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं।

थकान से बढ़ जाती है दिक्कत

दिन भर के काम के बाद थकान के साथ इसके लक्षण और बढ़ सकते हैं। मरीज़ को लग सकता है कि सिर्फ आराम की जरूरत है, लेकिन असल में यह बीमारी की प्रगति का संकेत हो सकता है।

कारण इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी

यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से नसों और मांसपेशियों के बीच संदेश पहुंचाने वाली प्रक्रिया को ब्लॉक कर देता है। कभी-कभी थाइमस ग्रंथि की समस्या भी इसका कारण बन सकती है।

इलाज से कंट्रोल संभव

हालांकि यह बीमारी पूरी तरह से ठीक नहीं होती, लेकिन दवाइयों, थाइमस ग्रंथि की सर्जरी और विशेष थैरेपी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सही समय पर इलाज से मरीज़ सामान्य जीवन जी सकता है।

वक्त रहते दें ध्यान

मायस्थेनिया ग्रेविस एक ऐसी बीमारी है जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। पुरुषों को 50 के बाद और महिलाओं को कम उम्र में भी इसके खतरे को समझना चाहिए। आंख, चेहरे या बोलने-निगलने में बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। समय पर पहचान और इलाज ही इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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