अमेरिका में दो कैथोलिक बिशपों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में प्रार्थना करने की तस्वीरें सार्वजनिक होने पर अफसोस जताया है। दोनों बिशपों का कहना है कि उन्हें बैठक निजी चर्चा के लिए बुलाया गया था, लेकिन व्हाइट हाउस ने तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक कर दिए। उनका आरोप है कि धार्मिक गतिविधि का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए किया गया। यह मामला अमेरिका के मध्यावधि चुनाव से दो सप्ताह से भी कम समय पहले सामने आया है।
मिल्वौकी के आर्चबिशप जेफ्री ग्रोब ने रविवार को ‘ए पब्लिक अपोलॉजी’ शीर्षक से बयान जारी कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि गुरुवार को हुई बैठक में वह और 11 अन्य बिशप शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें कई सवाल और प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिनमें कुछ लोगों ने गहरी निराशा और दुख जताया।
‘प्रार्थना जैसी पवित्र चीज का इस्तेमाल किया गया’
ग्रोब ने कहा कि व्हाइट हाउस ने बैठक के तुरंत बाद प्रतिभागियों की सहमति के बिना तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक कर दिए। उन्होंने कहा, “मुझे न केवल उस पीड़ा का दुख है, जो मेरे कारण हुई, बल्कि इस बात का भी कि धार्मिक नेताओं के लिए बेहद पवित्र चीज—स्वर्ग में हमारे पिता से प्रार्थना—का इस तरह इस्तेमाल किया गया।”
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता जताने वाले संदेश मिले कि कहीं वह अनजाने में राष्ट्रीय चुनाव से दो सप्ताह से भी कम समय पहले किसी राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा तो नहीं बन गए। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति की नीतियों से उन्हें या उनके परिवारों को नुकसान पहुंचा है।
