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साधारण सर्दी-जुकाम से त्रिदोष बैलेंस तक, गिलोय को कहा जाता है शरीर की प्राकृतिक ढाल

Giloy Benefits : जरूरी नहीं कि हर शारीरिक समस्या के लिए दवाओं का सहारा लिया जाए। आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियां हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी लड़ने में सहायक है। जी हां कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से आयुर्वेद का सहारा लिए बगैर पार पाना मुश्किल काम है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

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benefits of giloy

Giloy Benefits : आयुर्वेद में कई तरह के सामान्य रोगों से लेकर गंभीर और असाध्य रोगों का इलाज कर पाना संभव है। जी हां आज हम आपको आयुर्वेद की एक परम औषधि के बारे में बताने जा रहे हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, गिलोय एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो शरीर के तीन मुख्य दोषों वात, पित्त और कफ को संतुलित करती है। यह आयुर्वेद में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। गिलोय को गुडूची या अमृता भी कहते हैं। यह एक लता होती है जिसके तने और पत्तों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

गिलोय के गुण

गिलोय में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। इसके अलावा, गिलोय में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, यानी यह सूजन को कम करती है। सबसे खास बात यह है कि इसमें कैंसर रोधी गुण भी मौजूद हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में मदद कर सकते हैं।

गिलोय के लाभ

गिलोय कई आम बीमारियों में राहत देती है। बुखार होने पर गिलोय का सेवन जल्दी आराम दिला सकता है। पीलिया में यह लिवर को मजबूत बनाने में मददगार है। गठिया के दर्द और जोड़ों की सूजन में यह बहुत फायदेमंद है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी गिलोय फायदेमंद है। यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक है। कब्ज, एसिडिटी और अपच जैसी पेट की समस्याओं में यह पाचन तंत्र को सुधारती है। मूत्र संबंधी समस्याओं जैसे जलन या संक्रमण में भी गिलोय राहत पहुंचाती है।

त्रिदोष नाशक

आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वात, पित्त और कफ का असंतुलन ही बीमारियों का मुख्य कारण होता है। गिलोय इन तीनों दोषों को संतुलित करती है। वात दोष से होने वाली बेचैनी, पित्त से जलन और कफ से भारीपन में यह नियंत्रण लाती है। इससे शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है।

कैसे करें सेवन?

गिलोय का उपयोग आसान है। इसका काढ़ा बनाकर पी सकते हैं, चूर्ण के रूप में ले सकते हैं या टैबलेट भी उपलब्ध हैं। लेकिन किसी भी औषधि की तरह, इसे डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बाद लेना चाहिए।

इनपुट - आईएएनएस

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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