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6 साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप पिलाना हो सकता है खतरनाक, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी

अगर आप भी खांसी होने पर बच्चों को कफ सिरप देते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। बता दें छोटे बच्चों को कफ सिरप देना काफी खतरनाक हो सकता है। अगर बिना जांच के बच्चों को कफ सिरप दिया जाता है तो यह जानलेवा हो सकता है। इसको लेकर हेल्थ एक्सपर्ट भी चेतावनी दे रहे हैं। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं...

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6 साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप पिलाना हो सकता है खतरनाक, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी

6 साल से छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप देना जानलेवा साबित हो सकता है। देश के जाने-माने पीडियाट्रिशियन डॉक्टर रवि मलिक ने कहा कि 6 साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप देना ही नहीं चाहिए।चिकित्सा विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों की तमाम संस्थाओं ने साफ चेतावनी दी है कि बच्चों में कफ (बलगम) को दबाने वाली दवाइयां न तो लाभकारी होती हैं और कई बार नुकसानदेह भी साबित हो सकती हैं।

बच्चों को कफ सिरप से कोई फायदा नहीं

कफ सिरप में मौजूद कुछ रसायन जैसे डेक्सट्रोमेथॉरफैन (Dextromethorphan) बच्चों की हृदय गति (हार्टबीट) और अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। यदि यह दवाइयां गलत मात्रा में दे दी जाएं, तो यह जानलेवा भी हो सकती हैं।

डायग्नोसिस जरूरी, कफ सिरप नहीं

डॉक्टरों का कहना है कि हर खांसी का इलाज कफ सिरप नहीं होता। जरूरी है कि बच्चे को सही ढंग से डायग्नोज (जांच) किया जाए कि खांसी की वजह अस्थमा है, एलर्जी है या कोई और कारण। तुरंत सिरप देने के बजाय बच्चे को हाइड्रेटेड रखें, भाप (नेबुलाइज़र) दें और डॉक्टर की सलाह लें।

डोज का ध्यान जरूरी

2 साल, 4 साल और 6 साल के बच्चों की दवा की मात्रा (डोज) अलग-अलग होती है। कई बार माता-पिता घर में रखे बड़े लोगों के लिए बने सिरप या केमिस्ट से सीधे खरीदी गई दवाएं बच्चों को दे देते हैं, जो एक्सीडेंटल मेडिसिन प्वाइजनिंग का कारण बन सकती हैं।

यह केवल भारत ही नहीं, दुनियाभर की बड़ी चिंता है। अमेरिका, यूरोप और भारत की सभी पीडियाट्रिक संस्थाएं यही कहती हैं कि 6 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने से बचना चाहिए।

बाल रोग विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश

  • बिना कारण बच्चों को सिरप न दें।
  • हर खांसी की दवा कफ सिरप नहीं होती।
  • नेबुलाइजर या अन्य ट्रीटमेंट डॉक्टर की सलाह से दें।
  • कफ सिरप देने से पहले कन्फर्म करें कि समस्या क्या है।
  • दवाओं का डोज डॉक्टर ही तय करे।

हाल के मामलों में यह देखा गया है कि कुछ बच्चों की तबीयत कफ सिरप पीने के बाद बिगड़ी। इस पर विशेषज्ञों ने मांग की है कि हर ऐसी दवा की गहन जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और अगर बाजार में मौजूद किसी कफ सिरप से खतरा है तो उस पर तुरंत बैन लगाया जाए।

विशेषज्ञों ने अपील की है कि माता-पिता में इस विषय पर जागरूकता होनी चाहिए। किसी भी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर सीधे बच्चों को न दें। घर में रखी दवा बच्चों की पहुंच से दूर रखें और कभी भी बड़ों की दवा बच्चों को न पिलाएं।

bhawana gupta
भावना किशोर author

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यू... और देखें

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