हेल्थ

शरीर की गंध खोल सकती है सेहत के राज, बता सकती है इस बीमारी का रिस्क, रिसर्च में सामने आई बड़ी बात

हालिया शोध में खुलासा हुआ है कि परकिंसंस रोग की पहचान शरीर की गंध से की जा सकती है। मरीजों की त्वचा से निकलने वाले सेबम में खास बदलाव पाए गए हैं, जिनसे शुरुआती स्टेज में बीमारी पकड़ना आसान हो सकता है। यह तरीका नॉन-इनवेसिव और फ्यूचर में बड़े स्तर पर डायग्नोसिस के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

Image

शरीर की गंध बताती है सेहत का हाल

परकिंसंस रोग को पहचानना अक्सर देर से होता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के और आम लगते हैं। लेकिन अब एक दिलचस्प रिसर्च ने उम्मीद जगाई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बीमारी का पता शरीर की गंध से भी लगाया जा सकता है। दरअसल, परकिंसंस से जूझ रहे लोगों की त्वचा से निकलने वाली गंध दूसरों से अलग होती है। यह खास गंध सेबम में मौजूद तत्वों की वजह से बनती है। यह खोज आगे जाकर शुरुआती स्टेज में बीमारी की पहचान का नया रास्ता खोल सकती है।

परकिंसंस क्या है और क्यों है खतरनाक

यह एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो दिमाग की नसों को प्रभावित करती है। धीरे-धीरे मरीज को कंपकंपी, चलने-फिरने में दिक्कत और मांसपेशियों में जकड़न महसूस होने लगती है। दुनिया भर में लाखों लोग इससे प्रभावित हैं और इसकी समय पर पहचान बहुत जरूरी मानी जाती है।

गंध से पहचान कैसे संभव हुई

शोध में सामने आया कि मरीजों की त्वचा से निकलने वाले सेबम में खास तरह के केमिकल बदलाव होते हैं। ये बदलाव एक अलग तरह की गंध पैदा करते हैं, जिसे मशीनों और एक्सपर्ट्स आसानी से पकड़ सकते हैं। यही गंध बीमारी का शुरुआती संकेत बन सकती है।

कौन से केमिकल करते हैं असर

वैज्ञानिकों ने पाया कि मरीजों के सेबम में कुछ खास जैविक यौगिक (VOCs) अलग मात्रा में मौजूद होते हैं। यही तत्व शरीर से एक खास तरह की गंध निकालते हैं। आम लोगों में यह बदलाव नहीं देखा जाता, इसलिए इन्हें एक संभावित बायोमार्कर माना जा रहा है।

नॉन-इनवेसिव डायग्नोसिस का फायदा

अब तक परकिंसंस की पहचान दवाओं और लक्षणों को देखकर होती थी, लेकिन गंध पर आधारित टेस्ट पूरी तरह नॉन-इनवेसिव यानी बिना दर्द और बिना जटिल प्रक्रिया के होंगे। इससे जल्दी डायग्नोसिस संभव हो सकेगा और मरीज को बेहतर इलाज मिल पाएगा।

रिसर्च कहां तक पहुंची है

वैज्ञानिक फिलहाल इस दिशा में और टेस्ट कर रहे हैं। अगर आने वाले समय में यह तरीका पूरी तरह से कारगर साबित होता है तो यह परकिंसंस जैसी गंभीर बीमारी की पहचान करने का बेहद आसान और भरोसेमंद साधन बन सकता है।

शरीर की गंध को अब तक सिर्फ स्वच्छता या डाइट से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन यह रिसर्च बताती है कि यह हमारे स्वास्थ्य का भी संकेत हो सकती है। परकिंसंस जैसी बीमारी का पता अगर शुरुआती स्टेज में लग जाए तो मरीज की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है। इस खोज ने भविष्य के इलाज और डायग्नोसिस की नई उम्मीदें जगाई हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

और पढ़ें
End of Article