क्‍या कोई इंसान साल में सो सकता है 300 द‍िन ? जानें क्‍या है Hypersomina स्लीप डिस्‍ऑर्डर और इसके लक्षण व इलाज

Hypersomina meaning in hindi : दुनिया में करीब 40 प्रतिशत लोग हाइपरसोमनिया की समस्या से जूझ रहे हैं। यह एक स्लीप डिसऑर्डर है जिसकी वजह से इंसान हमेशा थका-थका महसूस करता है।

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hypersomnia sleep disorder (Pic: Istock) 

मुख्य बातें

  • विज्ञान के अनुसार, अगर नींद पूरी होने के बाद भी आपको नींद आती रहती है तो यह हाइपरसोमनिया नाम के स्लीप डिसऑर्डर का लक्षण हो सकता है।
  • जानकारों के मुताबिक, हाइपरसोमनिया दो तरह के होते हैं जिन्हें प्राइमरी हाइपरसोमनिया और सेकेंडरी हाइपरसोमनिया के नाम से जाना जाता है।
  • अगर आपको हमेशा थकान रहती है, इसके साथ आलसपन, चिड़चिड़ापन, एंग्जाइटी, बेचैनी आदी की समस्या रहती है तो यह हाइपरसोमनिया के लक्षण हैं।

What is Hypersomina : विज्ञान के अनुसार, दुनिया भर में कई लोग भिन्न-भिन्न प्रकार के स्लीप डिसऑर्डर के शिकार हैं। कुछ लोग नींद ना आने के वजह से परेशान रहते हैं वहीं कुछ लोग ज्यादा नींद आने के वजह से परेशान रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है करीब 40 प्रतिशत लोग ज्यादा नींद आने की समस्या से परेशान हैं। हाल ही में खबर आई थी क‍ि एक व्‍यक्‍त‍ि साल में करीब 300 द‍िन तक सोता है और फिर भी उसे लगता है क‍ि नींद पूरी ही नहीं हुई। 

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दरअसल, विज्ञान की भाषा में इस स्लीप डिसऑर्डर को हाइपरसोमनिया का नाम दिया गया है। यह एक ऐसा डिसऑर्डर है जिसमें किसी व्यक्ति को हर पल नींद आती रहती है, यहां तक की नींद पूरी होने के बाद भी यह लोग सोने के लिए मजबूर रहते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस स्लीप डिसऑर्डर की वजह से एक व्यक्ति करीब 300 दिनों तक लगातार सो रहा था। यह परेशानी बेहद गंभीर है क्योंकि इस समस्या से पीड़ित लोगों के शरीर में ऊर्जा कम होती रहती है इसके साथ वह शारीरिक और मानसिक रूप से एकदम कमजोर हो जाते हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि हाइपरसोमनिया नींद से जुड़ी एक समस्या है जिससे पीड़ित व्यक्ति हमेशा सोने के लिए बेचैन रहता है। रात में नींद पूरी करने के बाद भी ऐसे लोगों को दिन में भी नींद आती रहती है और हमेशा आलसपन भरा रहता है। ऊर्जा न होने के वजह से ऐसे व्यक्ति कई गंभीर रोगों के घेरे में आ सकते हैं।

दो प्रकार का होता है हाइपरसोमनिया, Hypersomina types in hindi 

हाइपरसोमनिया दो प्रकार का होता है जिन्हें प्राइमरी हाइपरसोमनिया और सेकेंडरी हाइपरसोमनिया के नाम से जाना जाता है। जब किसी व्यक्ति के मस्तिष्क के तंत्र नींद में जागने और नींद से उठने की क्रिया को ठीक से संचालित नहीं कर पाते हैं तो यह प्राइमरी हाइपरसोमनिया की समस्या है। वहीं, अगर किसी व्यक्ति को हर पल गहरी नींद की समस्या रहती है और वह हमेशा थकान से परेशान रहता है तो यह सेकेंडरी हाइपरसोमनिया है।

हाइपरसोमनिया के लक्षण, hypersomnia symptoms

थकान, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, एंग्जाइटी, बेचैनी, सोचने-समझने, बालने और याद रखने में दिक्कत होना, ऊर्जा की कमी आदि हाइपरसोमनिया के लक्षण हैं।

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हाइपरसोमनिया की समस्या नींद पूरी ना होना, नैक्रोप्लास्टी, शराब और नशीली दवाओं के सेवन, कैफिन, स्लीप एप्निया, मोटापा, न्यूरोलॉजिकल समस्या, हाइपो-थाइरॉएडिज्म और किडनी के रोग की वजह से हो सकती है।

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अगर आपको यह लक्षण दिखाई दे रहें तो आप अपने डॉक्टर से इसकी चर्चा जरूर करें। इसके साथ अपने दैनिक जीवन में कुछ अच्छे बदलाव लाइए। अगर आपको यह समस्या है तो डॉक्टर ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन और स्लीप टेस्ट जैसे कदम ले सकते हैं। इसके साथ आपके डॉक्टर आपकी धड़कन, मस्तिष्क की गतिविधियों और सांसों पर भी नजर रख सकते हैं।

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