बहरा बना सकता है कोरोना वायरस, संक्रमण से कम हो सकती है सुनने की क्षमता

जहां एक तरफ लॉन्ग टर्म कोरोना लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है वहीं दूसरी ओर कोरोना से संक्रमित होने के बाद लोगों के सुनने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

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कोरोना बना सकता है बहरा 

मुख्य बातें

  • कोरोना वायरस सुनने की क्षमता पर भी डाल रहा है प्रभाव, बना सकता है बहरा
  • तेजी से बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले, मरने वालों की संख्‍या भी बढ़ी
  • समय रहते स्टेरॉइड और दवाइयों से हो सकता है इलाज

देश में पिछले एक साल से कोरोना का कहर जारी है, एक बार फिर कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ने लगा है। पिछले कई दिनों से कोरोना वायरस के दैनिक मामलों में बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक आपको बता दें देशभर में पिछले 24 घंटे में 47000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं 275 लोग कोरोना से अपनी जान गंवा बैठे हैं। टीकाकरण के बाद एक बार फिर कोरोना का पलटवार हो रहा है। दिन प्रतिदिन इसके लक्षणों में भी बदलाव आ रहे हैं। जहां एक तरफ लॉन्ग टर्म कोरोना लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है वहीं दूसरी ओर कोरोना से संक्रमित होने के बाद लोगों के सुनने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना का भयावह प्रकोप श्रवंण क्षमता पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है। ब्रिटेन में हुए इस शोध अध्ययन को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ऑडियोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। इस शोध के निष्कर्ष में बताया गया है कि कोरोना वायरस इंसानों के सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। वेल्स में 56 से अधिक मामलों पर रिसर्च के दौरान इस पर पुष्टि की गई है। ऐसे में आपको कोरोना के प्रति अधिक सजग होने की आवश्यकता है। कई अध्ययनों के दौरान यह देखा गया है कि अब तक वायरस फेफड़ों के अलावा हार्ट, लिवर और अन्य अंगों को प्रभावित कर रहा है। लेकिन अब वेल्स की रिपोर्ट के अनुसार वायरस का प्रकोप श्रंवण क्षमता पर भी पड़ता है। यह इंसान को बहरा भी बना सकता है।

टिनीटस

आपको बता दें टिनीटस कानों से संबंधित एक बामारी है। इस परिस्थिति में कान में कुछ बजते रहने की आवाज आती है। ऐसा लगता है कि जैसे कोई सीटी बज रही है या फिर कुछ अलग तरह का शोर मच रहा है। कानों से संबंधित यह भयावह बीमारी है, इस दौरान कानों में तेज दर्द शुरु हो जाता है औऱ इसका असर मस्तिष्क पर भी पड़ता है। कोविड के मरीजों में यह भी देखने को मिल रहा है। हालांकि डॉक्टर्स ने इसे कोविड का क्लासिक लक्षण नहीं माना है। यदि कोविड लक्षणों के दौरान आप इस समस्या से ग्रसित हैं तो आपको अधिक सजग होने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में आप श्रवंण क्षमता खो सकते हैं। इसलिए ऐसे में आपको अपने डॉक्टर्स को तुरंत सूचित करना चाहिए।

सुनने की क्षमता खो देना

एक या दोनों कानों में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा हो सकता है। वेल्स के अध्ययन के दौरान 7.6 प्रतिशत से अधिक लोग बहरेपन की समस्या से ग्रसित हुए हैं। तथा कुछ लोगों में सुनने की क्षमता में गड़बड़ी देखी गई है। वहीं आपको बता दें शोध के मुताबिक जब मरीजों से उनके सुनने की क्षमता के बारे में पूछा गया तो 121 संक्रमितों में से 16 लोगों ने कहा कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के आठ हफ्ते बाद उनके सुनने की क्षमता कम हो गई थी। इनमें से 8 लोगों ने कहा कि उनके श्रवंण क्षमता में गड़बड़ी पैदा हो गई थी। जबकि आठ ने टिनीटस की शिकायत की।

चक्कर आना

आपको बता दें चक्कर आना, उल्टी होना, जी मिचलाना ये कोई कोरोना वायरस के क्लासिक लक्षण नहीं हैं। डब्ल्यू एचओ और अन्य स्वास्थ्य संगठनों ने भी इस पर मोहर लगा दी है। लेकिन चक्कर आने पर जब व्यक्ति घूमने जैसा महसूस कर रहा हो तो इसका असर कान पर हो सकता है। ऐसे में आपको कोरोना के इस लक्षण से भी सजग रहने की आवश्यकता है। कोरोना से संक्रमित होने के दौरान कान पर कोई भी प्रभाव होने पर तुरंत अपने डॉक्टर को सूचित करें। सही समय पर इसका इलाज कर स्टेरॉइड औऱ दवाई द्वारा इसे ठीक किया जा सकता है।
 

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