Who is Ritabrata Banerjee : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बगावत कर नया गुट तैयार करने वाले ऋतब्रत बनर्जी बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) बन गए हैं। टीएमसी के सबसे बड़े संकट के केंद्र में ऋतब्रत हैं। टीएमसी में शामिल होने से पहले वह माकपा में थे और सीताराम येचुरी के करीबी माने जाते थे। माकपा में इनकी सियासी यात्रा भी बेहद नाटकीय रही। कम समय में ही इन्होंने पार्टी में अपना उत्थान और पतन दोनों देखा। टीएमसी में आने के बाद ऋतब्रत ने अपनी एक पहचान बना ली और इनकी गिनती ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में होने लगी लेकिन पार्टी से निष्कासित होने के बाद ऋतब्रत, ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं।
बंगाल विधानसभा में LoP बने हैं ऋतब्रत
बुधवार को टीएमसी के 80 विधायकों में से 59 एमएलए को लेकर ऋतब्रत विधानसभा पहुंचे। इन 59 विधायकों ने एलओपी के लिए उनके नाम का समर्थन किया। स्पीकर ने भी ऋतब्रत को एलओपी की मान्यता दे दी। ऋतब्रत का एलओपी बनना ममता के लिए बड़ा झटका मााना जा रहा है। खास बात यह है कि बागी विधायकों ने स्पीकर को जो पत्र सौंपा है, उसमें ममता बनर्जी को ही पार्टी का नेता बताया गया है। पत्र में ऋतब्रत को एलओपी जबकि सेउली साहा, जावेद खान, सबीना यास्मीन को सदन का डिप्टी लीडर बताया गया है।
कभी बंगाल में माकपा का युवा चेहरा थे
टीएमसी में आने से पहले ऋतब्रत बंगाल में माकपा का युवा चेहरा हुआ करते थे और इन्हें लेफ्ट पार्टी में भविष्य के नेता के रूप में देखा जाता था लेकिन माकपा में इनकी सियासी पारी लंबे दौर तक नहीं चल पाई। एक स्कैंडल के सामने आने और एक विवादित इंटरव्यू के बाद इन्हें माकपा से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद साल 2018 में ऋतब्रत, टीएमसी में शामिल हुए। टीएमसी में शामिल होने के बाद इन्होंने कई मौकों पर ममता बनर्जी की खुलकर तारीफ की और उन्हें लेफ्ट का असली नेता बताया।
सुवेंदु ने नाम लिया और टीएमसी से हुए 'निष्कासित'
टीएमसी में अपना रसूख रखने वाले ऋतब्रत के लिए सब कुछ ठीक था। यहां तक कि बंगाल में टीएमसी की भीषण हार में भी वह जीतकर विधानसभा पहुंचे लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने ऋतब्रत और संदीपन साहा का नाम लिया। इन दोनों नेताओं को 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' के लिए टीएमसी से निष्कासित कर दिया गया। दरअसल, सीएम सुवेंदु ने कहा कि टीएमसी के इन दोनों नेताओं ने पत्र पर अपने फर्जी हस्ताक्षर होने की स्पीकर से शिकायत की है। इसके बाद टीएमसी ने इन दोनों नेताओं को पार्टी से निकालने का फैसला कर लिया।
SFI का आठ सालों तक नेतृत्व किया
ऋतब्रत की शैक्षिक योग्यता की अगर बात करें तो इन्होंने कोलकाता के साउथ प्वाइंट हाई स्कूल और आशुतोष कॉलेज से पढ़ाई की है। 2000 के दशक की शुरुआत में छात्र नेता के रूप में चर्चा में आए थे। बाद में ऋतब्रत माकपा की छात्र इकाई एसएफआई के अखिल भारतीय महासचिव बने और आठ वर्षों तक संगठन का नेतृत्व किया। दिवंगत वामपंथी नेता सीताराम येचुरी के करीबी माने जाने वाले ऋतब्रत का पार्टी में उदय बेहद तेज रहा। उस दौर में माकपा युवा चेहरों को आगे लाने में संकोच करती थी, फिर भी मात्र 34 वर्ष की उम्र में उन्हें राज्यसभा भेजा गया।
राजनीतिक सफर जल्द ही झटकों से घिरा
हालांकि, सत्ता की सीढ़ियां तेजी से चढ़ने वाले ऋतब्रत का राजनीतिक सफर जल्द ही झटकों से घिर गया। 2017 में माकपा में इन्हें पहले निलंबन और फिर निष्कासन का सामना करना पड़ा। माकपा में इन पर 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' में शामिल होने और पार्टी की विचारधारा के विपरीत जीवनशैली अपनाने का आरोप लगा। उस समय उन्हें एप्पल स्मार्टवॉच पहनने को लेकर भी आलोचना झेलनी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों ने ऋतब्रत पर कार्रवाई को माकपा के भीतर प्रकाश करात और सीताराम येचुरी खेमों के बीच टकराव से भी जोड़कर देखा।
महिला से लगा दुष्कर्म का आरोप
निष्कासन से कुछ दिन पहले ऋतब्रत ने एक इंटरव्यू में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रकाश करात, बृंदा करात और मोहम्मद सलीम के खिलाफ खुलकर बयान दिए थे। उसी वर्ष एक शोध छात्रा ने उन पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। ऋतब्रत ने आरोपों को खारिज करते हुए महिला पर ब्लैकमेल और वसूली का आरोप लगाया। बाद में एक निजी वीडियो कॉल के दृश्य वायरल हो गए और कभी उभरते युवा नेता के रूप में देखे जाने वाले ऋतब्रत राजनीतिक रूप से हाशिये पर चले गए।
TMC में की नई शुरुआत
माकपा से निष्कासन के बाद ऋतब्रत ने टीएमसी का दामन थाम लिया। शुरुआत में इन्हें पार्टी के ट्रेड यूनियन विंग की जिम्मेदारी सौंपी गई। 2021 में एक इंटरव्यू में ऋतब्रत ने ममता बनर्जी को 'वास्तविक वामपंथी नेता' माना। इसके बाद टीएमसी में ऋतब्रत ने अपनी खास पहचान बनाते हुए ममता के भरोसेमंद नेता बन गए। 2024 में टीएमसी ने इन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया। हालिया विधानसभा चुनाव में इन्होंने उलूबेरिया पूर्व सीट से जीत हासिल की। जीत के कुछ ही समय बाद दिल्ली स्थित बंग भवन में सुवेंदु अधिकारी से उनकी मुलाकात और सौहार्दपूर्ण बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद वह टीएमसी नेताओं के निशाने पर आ गए। हालांकि, इस मुलाकात पर ऋतब्रत ने सफाई देते हुए कहा कि यह एक मात्र शिष्टाचार मुलाकात थी। हालांकि, कहा जाता है कि सुवेंदु अधिकारी के साथ ऋतब्रत के अच्छे संबंध हैं।
